नई दिल्ली/बेंगलुरु, भारतीय उपभोक्ता वस्तु क्षेत्र में दो बड़ी कंपनियों ने गुरुवार को अलग-अलग मोर्चों पर महत्वपूर्ण विकास दर्ज किए। नेस्ले इंडिया ने जुलाई-सितंबर तिमाही में मजबूत मांग के बल पर 36 प्रतिशत मुनाफा वृद्धि दर्ज की, लेकिन खाद्य मुद्रास्फीति और कमोडिटी लागत के दबाव का अलर्ट जारी किया। वहीं पेप्सिको ने दिल्ली हाईकोर्ट में चेतावनी दी कि ‘एनर्जी ड्रिंक’ लेबल पर लगा प्रतिबंध जारी रहा तो अगले दो महीने में उसकी प्रमुख ड्रिंक्स का स्टॉक देशभर में खत्म हो सकता है, जबकि प्रतिद्वंद्वी रेड बुल को बिक्री की अनुमति मिली हुई है।
नेस्ले इंडिया ने स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग में बताया कि सितंबर तिमाही में नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 36.3 प्रतिशत बढ़कर ₹1,026.8 करोड़ (लगभग $108 मिलियन) रहा। कुल बिक्री 20.5 प्रतिशत बढ़कर ₹6,782 करोड़ पहुंच गई। कंपनी ने कहा कि यह वृद्धि सभी उत्पाद समूहों में डबल-डिजिट वॉल्यूम ग्रोथ से आई। EBITDA मार्जिन भी 23.8 प्रतिशत पर पहुंच गया।
कंपनी के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर मनीष तिवारी ने कहा, “राइजिंग इन्फ्लेशन, खासकर फूड इन्फ्लेशन, एक रियलिटी है।” उन्होंने बताया कि कंपनी इन्वोवेशन, ब्रांड इन्वेस्टमेंट और प्रोडक्टिविटी बढ़ाने के जरिए कमोडिटी लागत के दबाव को संभालने पर फोकस कर रही है। कॉफी और गेहूं की कीमतें रेंज-बाउंड रहने की उम्मीद है, जबकि चीनी और खाद्य तेल ऊंचे स्तर पर स्थिर हो गए हैं। कोकोआ मौसम संबंधी चिंताओं के कारण अस्थिर बना हुआ है। दूध की कीमतें मौसमी रूप से बढ़ी हैं, लेकिन फ्लश सीजन आने पर इनमें नरमी आने की संभावना है। परिणामों के बाद नेस्ले इंडिया के शेयरों में 5 से 8 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई, हालांकि बाद में कुछ रिकवरी भी हुई।
दूसरी ओर, पेप्सिको ने दिल्ली हाईकोर्ट में कहा कि FSSAI द्वारा ‘एनर्जी ड्रिंक’ लेबल पर लगाए गए प्रतिबंध के कारण कंपनी नई प्रोडक्शन शुरू नहीं कर पा रही है। वकील संदीप सेठी ने कोर्ट को बताया, “दो महीने बाद बाजार में माल नहीं बचेगा। मेरे प्रतिस्पर्धी मैन्युफैक्चर कर रहे हैं।” उन्होंने कहा कि नए पैकेजिंग और प्रिंटेड कैन्स के कारण प्रक्रिया लंबी और जटिल है, जिससे डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम प्रभावित होगा।
कोर्ट ने पेप्सिको, मॉन्स्टर और रिलायंस कंज्यूमर को मौजूदा स्टॉक बेचने की अनुमति दी है, लेकिन 6 अक्टूबर के बाद मैन्युफैक्चर हुए माल पर ‘एनर्जी ड्रिंक’ लेबल नहीं लगाने दिया। वहीं रेड बुल को पिछले महीने कोर्ट से राहत मिल चुकी है और वह लेबल के साथ बिक्री जारी रख सकता है। अगली सुनवाई 30 अक्टूबर को निर्धारित है। भारतीय एनर्जी ड्रिंक बाजार 2028 तक $1.6 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है। FSSAI ने जून में उच्च कैफीन वाले पेय पदार्थों पर इस लेबल के इस्तेमाल पर रोक लगाई थी, जिसे कंपनियां व्यावसायिक नुकसान का कारण बता रही हैं। दोनों घटनाक्रम भारतीय FMCG और बेवरेज सेक्टर में मांग की मजबूती के साथ-साथ लागत दबाव और नियामकीय चुनौतियों को रेखांकित करते हैं।
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