ओस्लो, दक्षिण अफ्रीका की प्रसिद्ध न्यायविद् और पूर्व इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट (ICC) जज नवानथेम ‘नवी’ पिल्ले को वर्ष 2026 का नोबेल शांति पुरस्कार दिया गया है। 85 वर्षीय पिल्ले को “शांति और अंतरराष्ट्रीय कानून को बढ़ावा देने के प्रयासों” के लिए यह सम्मान मिला है। नोबेल समिति ने शुक्रवार को घोषणा करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून की व्यवस्था भारी दबाव में है और इसके संस्थानों पर हमले हो रहे हैं। समिति ने कहा, “हम कानूनी ढांचे और कानून व न्याय के वैश्विक सम्मान की कीमत पर शक्ति राजनीति की ओर बढ़ते देख रहे हैं। जब शक्ति अधिकार पर हावी हो जाती है, तो यह स्थिरता, विश्वास और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व को कमजोर करता है।”
पिल्ले का जन्म दक्षिण अफ्रीका के डरबन में भारतीय तमिल मूल के परिवार में हुआ था। उन्होंने रवांडा ट्रिब्यूनल और ICC में जज के रूप में काम किया। वे संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार उच्चायुक्त भी रह चुकी हैं। पिछले साल वे उस यूएन जांच आयोग की अध्यक्ष थीं, जिसने गाजा में इजरायल द्वारा नरसंहार किए जाने का निष्कर्ष निकाला था। इजरायल ने इस रिपोर्ट को “स्कैंडल” करार दिया था। नोबेल समिति ने कहा कि पिल्ले ने राज्यों और राष्ट्रीय नेताओं को जवाबदेह ठहराया तथा हिंसा और संघर्ष के पीड़ितों को आशा दी। उनके करियर में एक मजबूत नैतिक कम्पास दिखाई देता है। समिति के अनुसार, उनके शुरुआती काम से लेकर नेल्सन मंडेला और रंगभेद विरोधी कार्यकर्ताओं की रक्षा से लेकर अंतरराष्ट्रीय अदालतों में प्रमुख मामलों तक एक समान सूत्र जुड़ा हुआ है।
1967 में वे नटाल प्रांत में कानून का अभ्यास शुरू करने वाली पहली महिला बनीं और दक्षिण अफ्रीका की हाई कोर्ट में पहली गैर-श्वेत महिला जज भी बनीं। इस साल का शांति पुरस्कार लगभग 1.2 मिलियन डॉलर (12 मिलियन स्वीडिश क्रोनर) का है। यह पुरस्कार 10 दिसंबर को ओस्लो में अल्फ्रेड नोबेल की पुण्यतिथि पर प्रदान किया जाएगा।

