भारत में प्राकृतिक गैस की खपत घटी, 15% हिस्सेदारी का लक्ष्य चुनौती में

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Delhi News:  नई दिल्ली। भारत में चालू वर्ष के दौरान प्राकृतिक गैस की खपत में गिरावट दर्ज की गई है, जिससे देश की ऊर्जा खपत में गैस की हिस्सेदारी को मौजूदा 6–7 फीसदी से बढ़ाकर 15 फीसदी करने का सरकार का लक्ष्य मुश्किल होता दिख रहा है। क्रिसिल की ओर से सोमवार को जारी रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल से अक्टूबर 2025 के बीच देश में प्राकृतिक गैस की औसत खपत करीब 190 मिलियन स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर प्रतिदिन (MMSCMD) रही, जो पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि के 200 MMSCMD की तुलना में 4.6 फीसदी कम है।

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सरकारी एजेंसी पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) के आंकड़े इस अवधि में गैस खपत में 8.6 फीसदी की गिरावट दर्शाते हैं। क्रिसिल का कहना है कि यह गिरावट स्थायी न भी हो, लेकिन इससे यह साफ संकेत मिलता है कि देश में गैस की खपत बढ़ाने की रणनीति अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ पा रही है।

महंगी LNG बनी बड़ी वजह
रिपोर्ट के मुताबिक स्पॉट एलएनजी (LNG) की ऊंची कीमतें गैस खपत में गिरावट की बड़ी वजह हैं। चालू वित्त वर्ष में स्पॉट एलएनजी की औसत कीमत करीब 13 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू रही, जो पिछले साल के मुकाबले 34 फीसदी अधिक है। इसका सबसे ज्यादा असर गैस आधारित बिजली संयंत्रों पर पड़ा है।

25 हजार मेगावाट क्षमता के संयंत्र ठप
देश में करीब 25,000 मेगावाट की गैस आधारित बिजली उत्पादन क्षमता मौजूद है, लेकिन पर्याप्त और सस्ती गैस न मिलने के कारण ये संयंत्र पूरी तरह संचालित नहीं हो पा रहे हैं। जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस सस्ती होती है, तब कुछ संयंत्र आयातित गैस से उत्पादन करते हैं, लेकिन 13 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू जैसी ऊंची कीमत पर बिजली बनाना आर्थिक रूप से फायदेमंद नहीं रह जाता। महंगी बिजली के लिए खरीदार नहीं मिलने से कंपनियां गैस आयात से बचती हैं।

सरकार का 2030 का लक्ष्य दबाव में
यह स्थिति केंद्र सरकार के उस महत्वाकांक्षी लक्ष्य के विपरीत है, जिसके तहत वर्ष 2030 तक कुल ऊर्जा खपत में प्राकृतिक गैस की हिस्सेदारी 15 फीसदी तक पहुंचाने की योजना है। यह लक्ष्य स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने और कार्बन उत्सर्जन घटाने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में तय किया गया था।

मानसून और मौसम का भी असर
क्रिसिल के अनुसार, समय से पहले मानसून आने के कारण गर्मी के मौसम में कूलिंग की मांग कम रही। पिछले वर्ष जहां नीतिगत समर्थन के चलते गैस आधारित बिजली संयंत्रों का डिस्पैच बढ़ा था, वहीं इस साल ऐसा नहीं हो सका।

सीजीडी सेक्टर में मजबूती
हालांकि सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) सेक्टर में सकारात्मक रुझान देखने को मिला है। इस क्षेत्र में गैस की खपत सालाना आधार पर 8.8 फीसदी बढ़कर 44 MMSCMD हो गई है। कुल गैस खपत का करीब 23 फीसदी हिस्सा सीजीडी सेक्टर से आता है। देशभर में CNG स्टेशनों और घरेलू PNG कनेक्शनों के तेजी से विस्तार के चलते इस क्षेत्र में मजबूती बनी हुई है।

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