देशभर विधानसभा चुनाव 2026: चुनाव आयोग ने कल (15 मार्च) देश के पाँच राज्यों- पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और केंद्रशासित प्रदेश पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव की तारीखें घोषित कर दीं। इसके कुछ घंटों बाद ही आयोग ने बंगाल में बड़ा प्रशासनिक रीशफल कर दिया – चीफ सेक्रेटरी नंदिनी चक्रवर्ती और डीजीपी पीयूष पांडे को हटा दिया गया। नया डीजीपी (इन-चार्ज) सिद्ध नाथ गुप्ता (1992 बैच IPS) और नया चीफ सेक्रेटरी दुष्यंत नरियाला (1993 बैच IAS) बनाए गए। कोलकाता पुलिस कमिश्नर सुप्रतिम सरकार की जगह अजय कुमार नंद को लगाया गया। आयोग ने साफ निर्देश दिया कि ट्रांसफर अधिकारी चुनाव से जुड़े किसी काम में नहीं लगाए जाएँगे।
चुनाव कार्यक्रम:
असम, केरल और पुडुचेरी: 9 अप्रैल (एक चरण)
तमिलनाडु: 23 अप्रैल (एक चरण)
पश्चिम बंगाल: दो चरण – 23 अप्रैल (152 सीटें) और 29 अप्रैल (142 सीटें)
मतगणना: सभी जगह 4 मई 2026
आयोग ने कहा कि वोटर लिस्ट का स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन पूरा हो चुका है और मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट तुरंत लागू।
नेताओं की प्रतिक्रियाएँ: TMC (ममता बनर्जी): तीखी आलोचना। TMC ने कहा, “EC ने अपने राजनीतिक मालिकों (BJP) की माँग मान ली। बंगाल में दो चरण क्यों? यह पक्षपात है।” TMC सूत्रों ने रीशफल को “टारगेटेड” बताया और कहा कि आयोग बंगाल सरकार से लगातार टकराव की स्थिति में है (वोटर लिस्ट रिवीजन और बूथ लेवल अधिकारियों की पेमेंट पर पहले भी विवाद)। • BJP: पूरी तैयारी का दावा। BJP राष्ट्रीय प्रवक्ता ने कहा, “हम पंचायत से लेकर राज्य स्तर तक कमेटियाँ बना चुके हैं। बंगाल में बदलाव का समय आ गया है। EC का रीशफल केवल निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए है।” असम और तमिलनाडु में भी BJP ने स्वागत किया। • अन्य दल: केरल में CPI(M)-CPI ने कैंडिडेट लिस्ट जारी कर दी। तमिलनाडु में DMK और AIADMK चुप, लेकिन तैयारियाँ तेज।
आम जनता की प्रतिक्रियाएँ: देशभर में आम लोगों में मिश्रित लेकिन सकारात्मक रिएक्शन है। सोशल मीडिया और सड़कों पर चर्चा – “अंत में लोकतंत्र जीत रहा है।” कोलकाता में एक दुकानदार ने कहा, “ईरान-इजरायल-अमेरिका जंग में तेल के दाम बढ़ रहे हैं, लेकिन चुनाव तो शांतिपूर्वक हो रहे हैं – यही भारत की ताकत है।” दिल्ली और चेन्नई में युवा वोटरों ने कहा, “हम विकास और रोजगार पर वोट देंगे, जंग का डर नहीं।” असम और केरल में स्थानीय मुद्दे (बाढ़, बेरोजगारी) चर्चा में हैं। पब्लिक ओपिनियन सर्वे (टाइम्स ऑफ इंडिया, NDTV) दिखाते हैं कि 70% लोग EC के फैसले को “समय पर और निष्पक्ष” मान रहे हैं।
ईरान-इज़रायल-अमेरिका जंग के बीच भारत का हाल: फरवरी 2026 से अमेरिका-इजरायल ने ईरान पर हमले शुरू किए (परमाणु साइट्स और मिलिट्री बेस टारगेट) और जंग अभी जारी है। तेल की कीमतें बढ़ीं, लेकिन भारत पर असर “सीमित” – क्योंकि भारत ने US-इजरायल का समर्थन किया और इरानी तेल आयात पहले ही कम कर दिया था। चुनाव आयोग ने कहा, “जियोपॉलिटिकल तनाव के बावजूद चुनाव प्रक्रिया प्रभावित नहीं होगी।” पीएम मोदी और विदेश मंत्रालय ने साफ किया – भारत की अर्थव्यवस्था और लोकतंत्र मजबूत है। ढोलेरा, सेमीकंडक्टर प्लांट्स जैसे प्रोजेक्ट्स पर कोई असर नहीं। आम जनता कह रही है, “दुनिया जल रही है, लेकिन हम वोट डाल रहे हैं – यही ‘अमृत काल’ है।”
निष्कर्ष: चुनाव आयोग का बंगाल रीशफल और देशव्यापी तारीखों का ऐलान दिखाता है कि भारत जंग के बावजूद अपनी प्राथमिकता – निष्पक्ष लोकतंत्र – पर अडिग है। TMC का विरोध राजनीतिक है, लेकिन जनता और BJP का भरोसा बढ़ा है। अब नजर 9 अप्रैल से शुरू होने वाले पहले चरण पर। क्या बंगाल में दो चरण का फॉर्मूला TMC को नुकसान पहुँचाएगा या BJP को फायदा? 4 मई को नतीजे बताएँगे।

