Namo Bharat Train: ‘एक ट्रेन, एक सपना’ – मेरठ के युवाओ और छात्राओं का ऑफिसर बनने का सपना बना हकीकत

Namo Bharat Train: आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर न सिर्फ यात्रा सुविधा दे रहा है, बल्कि लाखों युवाओं के सपनों को पंख भी लगा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 22 फरवरी 2026 को पूरे 82 किलोमीटर लंबे दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ नमो भारत रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) कॉरिडोर का उद्घाटन किए जाने के महज चार दिन बाद एक लघु फिल्म सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। फिल्म मेरठ की एक आम युवा लड़कियो और लड़को की सच्ची-सी लगने वाली कहानी है, जो गाजियाबाद के कोचिंग सेंटर में पढ़कर बड़े अफसर बनने का सपना देखते/देखती आ रहे है।

फिल्म की शुरुआत मेरठ के एक घर से होती है। लड़की/ लड़की अपनी मां से कहती है, “मां मुझे पढ़ना है, ऑफिसर बनना है। गाजियाबाद में एक कोचिंग सेंटर है, वहां मेरा एडमिशन करा दो ना प्लीज।” लेकिन मां बस की थकान भरी लंबी यात्रा, दूरी और रोजाना की परेशानी को लेकर मना कर देती हैं। पिता भी चिंतित रहते हैं। ठीक उसी वक्त नमो भारत ट्रेन आती है – जो सिर्फ एक ट्रेन नहीं, बल्कि ‘पहियों पर क्रांति’ का प्रतीक मानी जा रही है। आधुनिक तकनीक, ऊर्जा-कुशल डिजाइन और उच्च गति से लैस यह ट्रेन मेरठ-गाजियाबाद की दूरी को मिनटों का सफर बना देती है।

फिल्म में बदलाव का जादू दिखता है। नमो भारत के बारे में जानने के बाद मां भावुक होकर कहती हैं, “इस रैपिड रेल ने तो हमारी जिंदगी आसान कर दी। अब तू खूब मन लगा के पढ़ना और बड़ी अफसर बनकर देश का नाम रोशन करना।” बेटी/ बेटा अब बिना किसी चिंता के रोजाना सुरक्षित, तेज और आरामदायक ट्रेन से कोचिंग जाती है। फिल्म का निष्कर्ष दिल छू लेता है – “नमो भारत के साथ हम मिलकर एक नया, मजबूत और असीम संभावनाओं वाला भारत बना रहे हैं।”

वास्तविकता में भी यही हो रहा है
22 फरवरी 2026 को पीएम मोदी द्वारा उद्घाटन के बाद 23 फरवरी को पूर्ण परिचालन के पहले ही पूरे दिन में 1 लाख से ज्यादा यात्री नमो भारत में सफर कर चुके – NCRTC का अब तक का रिकॉर्ड कायम किया है। सराय काले खां (दिल्ली) से मोदीपुरम (मेरठ) तक का पूरा सफर अब महज 55-58 मिनट में पूरा हो जाता है, जबकि सड़क मार्ग पर ट्रैफिक में 2-3 घंटे या उससे ज्यादा लगते थे। गाजियाबाद स्टेशन इस रूट का अहम पड़ाव है, इसलिए मेरठ से गाजियाबाद की यात्रा अब बेहद आसान हो गई है। ट्रेन की ऑपरेशनल स्पीड 160 किमी/घंटा (डिजाइन स्पीड 180 किमी/घंटा) है।

NCRTC के आंकड़ों के अनुसार, यह प्रणाली NCR में पब्लिक ट्रांसपोर्ट की हिस्सेदारी बढ़ाकर रोजाना लाखों निजी वाहनों को सड़कों से हटाएगी, प्रदूषण कम करेगी और छात्रों-नौजवानों को बेहतर शिक्षा-रोजगार के अवसर उपलब्ध कराएगी। पहले से ही 99% पंचुअलिटी बनाए रखने वाली यह सेवा अब पूरे कॉरिडोर पर हर 10-15 मिनट में ट्रेन चलाने जा रही है।

आम लोगों के जीवन में बदलाव
यह सिर्फ एक फिल्म की कहानी नहीं, बल्कि हजारों मेरठ, गाजियाबाद और आसपास के इलाकों के छात्रों, कर्मचारियों और परिवारों की हकीकत है। पहले बस या कार से आने-जाने में थकान, समय की बर्बादी और सुरक्षा की चिंता रहती थी। अब नमो भारत ने ‘कनेक्टेड इंडिया’ का सपना साकार कर दिया है – शहरों को जोड़कर अर्थव्यवस्था, शिक्षा और आकांक्षाओं को नई ऊंचाई दी है। भारत सरकार के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास की इस मिसाल ने साबित कर दिया कि आधुनिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम न सिर्फ समय बचाता है, बल्कि सपनों को भी साकार करता है। फिल्म के नायक-नायिका की तरह अब हजारों मां-बेटियां कह रही हैं – “नमो भारत आ गया, अब कोई रुकावट नहीं!”

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