नालंदा मंदिर भगदड़: विशेष पूजा, भारी भीड़ ने ली महिलाओं की जान, बदला बिहार का राजनीतिक समीकरण

नालंदा मंदिर भगदड़: बिहार के नालंदा जिले में माघरा गांव स्थित मां शीतला मंदिर (Sheetla Mata Mandir) में भगदड़ मच गई। यह घटना चैत्र मास के आखिरी मंगलवार की विशेष पूजा के दौरान हुई, जब हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए जुटे थे। मंदिर में मेला भी लगा हुआ था।

घटना का क्रम

सुबह 2 बजे मंदिर की घंटियां बजनी शुरू हुईं और पूजा प्रारंभ हो गई। श्रद्धालु भोर से ही पहुंचने लगे। भीड़ गर्भगृह की सीढ़ियों के पास बढ़ गई। कुछ महिलाएं सीढ़ियों पर गिर गईं। पीछे से आने वाले लोग आगे बढ़ते रहे, जिससे एक के बाद एक लोग गिरते गए और एक-दूसरे पर ढेर हो गए। गवाहों के अनुसार “कोई नीचे नहीं देख रहा था”, सबका ध्यान मंदिर की ओर था। स्थानीय लोगों ने घायलों को बाहर निकाला और सीपीआर दिया, लेकिन 8 महिलाओं की मौत हो गई।

मृतक (सभी महिलाएं):
मालो देवी (36), कृंता देवी (48), रीता देवी (50), क्रांति देवी (50), देवांति देवी (35), रेखा देवी (45), गुड़िया देवी (35) — नालंदा की; आशा देवी (65) — नवादा की। घायल: 8 से 12 लोग (कुछ की हालत गंभीर)।

लापरवाही के कारण

मंदिर प्रबंधन ने भीड़ प्रबंधन के लिए कोई लिखित आवेदन नहीं किया। नियमित पुलिस तैनाती नहीं थी; केवल आवेदन पर होती है। मंदिर के अंदर और आसपास दुकानों से जगह कम हो गई। पहुंच मार्ग पर अतिक्रमण, जिससे एम्बुलेंस को घंटे भर लग गए। कोई बैरिकेडिंग या कतारबद्ध व्यवस्था नहीं।

प्रशासनिक कार्रवाई

बिहार डीजीपी विनय कुमार समेत वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। दीपनगर थाने के एसएचओ को सस्पेंड कर दिया गया। एसआईटी गठित, सीसीटीवी और फॉरेंसिक जांच शुरू। मृतकों के परिजनों को 6 लाख रुपये अनुग्रह राशि घोषित। घायलों का सदर अस्पताल में इलाज चल रहा है। स्थानीय लोग नाराज हैं—उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी भीड़ का अंदाजा पहले से था, फिर भी कोई तैयारी नहीं की गई।

राज्यसभा चुनाव के बाद बिहार का राजनीतिक समीकरण बदला

16 मार्च 2026 को हुए बिहार राज्यसभा चुनाव में एनडीए ने सभी 5 सीटें जीत लीं। इनमें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन (Nitin Nabin) शामिल हैं।

विपक्षी खेमे में सेंध

महागठबंधन (आरजेडी-कांग्रेस) के 41 विधायकों में से केवल 37 ही वोटिंग में पहुंचे। तीन कांग्रेस विधायक (मनोहर प्रसाद सिंह, सुरेंद्र प्रसाद, मनोज बिश्वास) गायब रहे या क्रॉस वोटिंग की। एक आरजेडी विधायक भी अनुपस्थित रहा। कांग्रेस में अभी नेता या व्हिप भी नहीं है, जिससे अनुशासन टूटने की आशंका बढ़ गई है।

एनडीए को फायदा

भाजपा के पास 89 विधायक + सहयोगी (जदयू सहित) 28 = 117। अगर चार कांग्रेस विधायक भाजपा में शामिल हो जाएं तो संख्या 121 हो जाएगी—जदयू के बिना भी बहुमत हासिल। इससे नीतीश कुमार और भाजपा पर जदयू की निर्भरता कम हो सकती है। कांग्रेस ने भाजपा पर “MLA खरीदने” का आरोप लगाया है, जबकि एनडीए इसे विपक्ष की कमजोरी बता रहा है।

दोनों घटनाओं से बिहार की तस्वीर

नालंदा की भगदड़ धार्मिक स्थलों पर भीड़ प्रबंधन की पुरानी समस्या को फिर उजागर करती है। वहीं राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस-महागठबंधन की फूट साफ दिखी। एक तरफ आम लोगों की जान जा रही है प्रशासनिक लापरवाही से, दूसरी तरफ राजनीतिक दलों में अनुशासन और एकता की कमी से समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। बिहार सरकार ने नालंदा मामले में जांच का आदेश दिया है, लेकिन बार-बार होने वाली ऐसी घटनाओं पर स्थायी समाधान की जरूरत है। राजनीतिक रूप से भी विपक्ष को अपनी घरेलू कमजोरियां दूर करनी होंगी, वरना 2025 के विधानसभा चुनाव में स्थिति और बदल सकती है।

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