Mobile Snatching: मोबाइल झपटमारी और दोपहिया वाहन चोर गिरोह का पर्दाफाश, पुलिस ने सरगना और उसके साथी को किया गिरफ्तार, दिल्ली-एनसीआर में 100 से अधिक वारदातों दे चुके अंजाम

Mobile Snatching: फेज-1 थाने की पुलिस ने दिल्ली-एनसीआर में मोबाइल झपटमारी और दोपहिया वाहन चोरी करने वाले गिरोह का सोमवार को पर्दाफाश कर सरगना और उसके साथी को गिरफ्तार किया। आरोपियों की निशानदेही पर 10 मोटरसाइकिल, दो स्कूटी और दो हजार रुपये बरामद किए गए। दोनों आरोपी ने 100 से अधिक वारदात कर चुके हैं।

डीसीपी यमुना प्रसाद ने बताया कि मुखबिर से मिली सूचना पर पुलिस ने सेक्टर-8 से दोनों आरोपियों को पकड़ा। उनकी पहचान राहुल उर्फ राबर्ट और नावेद के रूप में हुई। दोनों आरोपी लंबे समय से दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में वाहन चोरी और मोबाइल झपटमारी की वारदातों को अंजाम दे रहे थे। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे पहले इलाके की रेकी करते। मौका मिलते ही मोटरसाइकिल या स्कूटी चोरी कर लेते। इसके बाद चोरी के वाहनों का इस्तेमाल कर मोबाइल छीनते। लूटे गए मोबाइल फोन राह चलते लोगों को सस्ते दामों पर बेच देते। मोबाइल बेचकर जो रकम मिलती थी, उन्हें आपस में बांट लेते या शौक पूरे करने के लिए खर्च कर देते। पुलिस के अनुसार 30 वर्षीय राहुल उर्फ राबर्ट गिरोह का मुखिया है। वह दिल्ली का रहने वाला है। इस समय वह सेक्टर-128 क्षेत्र में रह रहा है। राहुल के खिलाफ दिल्ली और गौतमबुद्ध नगर में 24 से ज्यादा मुकदमे दर्ज हैं। दूसरा आरोपी 21 साल का नावेद है, जो दिल्ली के फतेहपुर बेरी इलाके का रहने वाला है। वह भी पहले से कई चोरी और स्नेचिंग के मामलों में वांछित चल रहा था।

झाड़ियों में छिपाए चुराए गए वाहन
पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर कुल 12 दोपहिया वाहन बरामद किए। इनमें दिल्ली और उत्तर प्रदेश के अलग-अलग इलाकों से चोरी की गई मोटरसाइकिल और स्कूटी शामिल हैं। चोरी के वाहनों को आरोपियों ने झाड़ियों में छिपाया था। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपियों की गिरफ्तारी से मोबाइल स्नेचिंग और वाहन चोरी की कई घटनाओं का खुलासा हुआ। आरोपियों ने अपने तीन अन्य साथियों के नाम भी बताए हैं। उनकी तलाश की जा रही है।
वाहनों क पुर्जे भी बेचे

पुलिस के अनुसार चोरी की बाइक और स्कूटी को आरोपी महज सात से 25 हजार रुपये में बेचते थे। दिल्ली के आसपास के जिलों के ग्रामीण क्षेत्रों में चोरी की बाइक को खपाया जाता था। कच्चे रास्ते से होते हुए बाइक वहां पहुंचाई जाती था। कभी-कभी गिरोह के सदस्य मजबूरी बताकर राहगीरों को भी बाइक बेच देते थे। जो वाहन नहीं बिक पाते, आरोपी उनके पुर्जे अलग करके बेच देता।

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