सोनम वांगचुक को 26 सितंबर 2025 को NSA की धारा 3(2) के तहत हिरासत में लिया गया था लद्दाख को राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची का संरक्षण दिलाने की मांग को लेकर हुए हिंसक प्रदर्शनों के दो दिन बाद। इन घटनाओं में चार लोगों की मौत और करीब 100 लोग घायल हुए थे। तब से वे जोधपुर जेल में बंद थे।
रिहाई की वजह क्या?
गृह मंत्रालय के बयान के अनुसार, वांगचुक छै। के तहत निर्धारित अवधि का लगभग आधा समय पहले ही पूरा कर चुके थे। यह फैसला लद्दाख के स्थानीय हितधारकों और समुदाय के नेताओं के साथ निरंतर संवाद के बाद लिया गया। सरकार ने यह भी माना कि चल रहे बंद और विरोध प्रदर्शनों ने छात्रों, नौकरी तलाशने वालों, व्यवसायों, पर्यटन संचालकों और स्थानीय अर्थव्यवस्था को गंभीर नुकसान पहुंचाया।
केंद्र का बड़ा यू-टर्न
यह फैसला इसलिए भी चैंकाने वाला है क्योंकि केंद्र सरकार इससे पहले अंत तक रिहाई का विरोध करती रही। फरवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि जिन आधारों पर वांगचुक को हिरासत में लिया गया था, वे अभी भी लागू हैं और स्वास्थ्य कारणों से भी उनकी रिहाई संभव नहीं। इतना ही नहीं, सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई 17 मार्च के लिए तय थी , लेकिन उससे पहले ही सरकार ने यह कदम उठा लिया।
पत्नी की लंबी कानूनी लड़ाई
वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. आंगमो ने NSA के तहत हिरासत को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। उनका कहना था कि छै। का आदेश ‘कट-कॉपी-पेस्ट’ था और जिला मजिस्ट्रेट ने उचित विवेक का इस्तेमाल नहीं किया।
आगे क्या?
वांगचुक की पत्नी ने पहले ही संकेत दिए थे कि रिहाई के बाद वे आंदोलन का रास्ता नहीं अपनाएंगे और बातचीत व सहयोग को ही आगे बढ़ने का एकमात्र रास्ता मानते हैं। गृह मंत्रालय ने भी हाई-पावर्ड कमेटी और अन्य उचित मंचों के जरिए लद्दाख की मांगों के समाधान के लिए रचनात्मक संवाद जारी रखने की प्रतिबद्धता दोहराई है। करीब पाँच महीने जोधपुर जेल में रहने के बाद सोनम वांगचुक की रिहाई को लद्दाख क्षेत्र में तनाव कम करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

