मेलानिया ट्रंप और एपस्टीन विवाद: ‘कोई संबंध नहीं’, कहा- ‘मैं उनकी पीड़िता नहीं हूं’; अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विवाद, भारत में पुराने दावों पर सियासी घमासान

मेलानिया ट्रंप और एपस्टीन विवाद: अमेरिका की फर्स्ट लेडी मेलानिया ट्रंप ने गुरुवार को व्हाइट हाउस में एक दुर्लभ सार्वजनिक बयान जारी कर जेफ्री एपस्टीन से किसी भी तरह के संबंध से साफ इनकार कर दिया। उन्होंने कहा, “मैं एपस्टीन की पीड़िता नहीं हूं। एपस्टीन ने मुझे डोनाल्ड ट्रंप से नहीं मिलवाया। मैंने अपने पति से 1998 में न्यूयॉर्क की एक पार्टी में संयोग से मुलाकात की थी।”

मेलानिया ने आगे कहा कि वे एपस्टीन के निजी द्वीप या उसके विमान पर कभी नहीं गईं और न ही उनके साथ दोस्ती थी। उन्होंने इन आरोपों को “बेबुनियाद झूठ” करार दिया और कांग्रेस से मांग की कि एपस्टीन की पीड़िताओं (survivors) को सार्वजनिक सुनवाई का मौका दिया जाए, जहां वे शपथ लेकर अपनी कहानी बता सकें।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं बयान के तुरंत बाद एपस्टीन की 13 पीड़िताओं और एक अन्य की भाई-बहन ने संयुक्त बयान जारी कर मेलानिया पर आरोप लगाया कि वे पीड़िताओं पर बोझ डाल रही हैं, जबकि असली जिम्मेदारी न्याय विभाग, कानून प्रवर्तन और ट्रंप प्रशासन पर है। उन्होंने कहा, “पीड़ितों ने पहले ही हिम्मत दिखा दी है। अब उनसे और मांगना जिम्मेदारी से बचना है।” समूह ने ट्रंप प्रशासन पर एपस्टीन फाइल्स ट्रांसपेरेंसी एक्ट का पालन न करने का आरोप भी लगाया।1

कांग्रेस के ओवरसाइट कमिटी के रैंकिंग मेंबर रॉबर्ट गार्सिया (डेमोक्रेट) ने मेलानिया के आह्वान का स्वागत किया और कहा कि सार्वजनिक सुनवाई तुरंत होनी चाहिए। अमेरिकी मीडिया में इसे “शॉकिंग” और “अप्रत्याशित” बयान बताया गया है, क्योंकि मेलानिया पहले इस मुद्दे पर चुप रहती थीं।

भारत में प्रतिक्रियाएं और मंत्री-परिवारों से जुड़े दावे भारत में मेलानिया के बयान की व्यापक चर्चा हो रही है। इंडिया टुडे समेत कई मीडिया हाउसों ने इसे प्रमुखता दी। हालांकि, इस बयान से सीधे भारत का कोई नया लिंक नहीं जुड़ा, लेकिन एपस्टीन फाइल्स के पुराने (जनवरी-फरवरी 2026) खुलासों को फिर से याद किया जा रहा है।

मुख्य दावे और स्पष्टीकरण:

केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी: एपस्टीन फाइल्स में उनके नाम का जिक्र है। उन्होंने 3-4 बार एपस्टीन से मुलाकात की, जो इंटरनेशनल पीस इंस्टीट्यूट (थिंक टैंक) के जरिए हुई थी। पुरी ने साफ कहा कि यह डिप्लोमैटिक और प्रोफेशनल संदर्भ में था, कोई गलत काम नहीं किया। उन्होंने विपक्ष (खासकर राहुल गांधी) के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि यह मीटिंग्स रीड हॉफमैन जैसे लोगों को भारत आमंत्रित करने से जुड़ी थीं।

पुरी की बेटी हिमायनी पुरी: सोशल मीडिया पर उनके नाम को एपस्टीन से जोड़कर वायरल पोस्ट्स चले। हिमायनी ने दिल्ली हाईकोर्ट में 10 करोड़ रुपये का मानहानि मुकदमा दायर किया। मार्च 2026 में कोर्ट ने X, फेसबुक, यूट्यूब, गूगल समेत प्लेटफॉर्म्स को ऐसी सामग्री हटाने का आदेश दिया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम: एपस्टीन की एक ईमेल में 2017 के इजराइल दौरे का जिक्र था, जिसमें अमेरिकी भूमिका का दावा किया गया। भारत सरकार ने इसे “convicted criminal की trashy ruminations” बताकर खारिज कर दिया। MEA ने कहा कि कोई मीटिंग, फ्लाइट लॉग या प्रत्यक्ष संपर्क नहीं है। अन्य भारतीय नामों (जैसे अनिल अंबानी) का भी फाइल्स में जिक्र आया था, लेकिन कोई आपराधिक आरोप नहीं लगा। विपक्ष ने इनका हवाला देकर सरकार से जवाब मांगा, जबकि सत्ता पक्ष ने इसे राजनीतिक हमला बताया।

कुल मिलाकर मेलानिया ट्रंप के बयान ने एपस्टीन कांड को फिर सुर्खियों में ला दिया है। विदेश में पीड़िताओं vs प्रशासन की बहस तेज हो गई है, जबकि भारत में यह पुरानी फाइल्स और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का मुद्दा बन गया है। फिलहाल कोई नया सबूत सामने नहीं आया है, लेकिन कांग्रेस की सुनवाई की मांग पर नजरें टिकी हुई हैं। यह मामला अब भी दुनिया भर में चर्चा का केंद्र बना हुआ है।

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