MEERUT LATEST CRIME NEWS: रेलवे कर्मी पति ने पत्नी को बंधक बनाकर दागा, फिर सोशल मीडिया पर कर दिया बदनाम, पुलिस ने शुरू की जांच

MEERUT LATEST CRIME NEWS: उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले से एक अत्यंत शर्मनाक और रूह कंपा देने वाला मामला सामने आया है, जहाँ एक रेलवे कर्मचारी पर अपनी ही पत्नी को वर्षों तक शारीरिक-मानसिक यातना देने के बाद उसे डिजिटल दुनिया में बेइज्जत करने के गंभीर आरोप लगे हैं।

तीन साल का नर्क
पीड़िता की शादी तीन साल पहले लालकुर्ती थाना क्षेत्र के रहने वाले एक रेलवे कर्मी से हुई थी। महिला का आरोप है कि शादी के कुछ समय बाद ही पति, सास और ननद ने उसे दहेज और अन्य बातों को लेकर प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। घर के भीतर उसे हर दिन अपमानित किया जाता था।

गर्म चिमटों से दागने की हैवानियत
महिला ने अपनी शिकायत में एक बेहद खौफनाक घटना का जिक्र किया। उसने बताया कि करीब एक साल पहले पति ने उसे आठ दिनों तक कमरे में बंधक बनाकर रखा और गर्म चिमटों से उसके शरीर को दाग रहा था। रिश्तेदारों के हस्तक्षेप और समझौते के बाद वह दोबारा ससुराल गई, लेकिन वहाँ उत्पीड़न कम नहीं हुआ, जिसके बाद वह अपने मायके कंकरखेड़ा लौट आई।

डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लगाई बोली
मायके पहुँचने के बाद भी पीड़िता को चैन नहीं मिला। आरोपी पति ने पीड़िता की गरिमा को ठेस पहुँचाने के लिए सोशल मीडिया पर उसकी अश्लील तस्वीरें अपलोड कर दीं, तस्वीरों के साथ अभद्र और गंदी टिप्पणियाँ लिखीं और सबसे शर्मनाक कृत्य करते हुए महिला की कीमत (रेट) लिखकर उसका मोबाइल नंबर सार्वजनिक कर दिया। इसके बाद से महिला के पास अनजान नंबरों से लगातार अश्लील कॉल और मैसेज आ रहे हैं, जिससे वह और उसका परिवार गहरे सदमे में है।

SSP तक पहुँची फ़रियाद
सोमवार को पीड़िता ने एसएसपी कार्यालय पहुँचकर अपनी आपबीती सुनाई और लिखित शिकायत दर्ज कराई। एसएसपी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सीओ दौराला को विस्तृत जाँच के आदेश दिए हैं। पुलिस ने आईटी एक्ट और प्रताड़ना की संबंधित धाराओं के तहत जाँच शुरू कर दी है।

कानूनी पहलू
यह मामला एक साथ कई कानूनों के तहत दर्ज होने योग्य है — दहेज उत्पीड़न (IPC धारा 498A), घरेलू हिंसा अधिनियम, IT एक्ट की धारा 67 (अश्लील सामग्री ऑनलाइन प्रकाशित करना) और BNS की संबंधित धाराएँ।

महिला संगठनों में आक्रोश
इस घटना की खबर फैलते ही मेरठ के महिला संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं में तीखी प्रतिक्रिया देखी जा रही है। उनका कहना है कि ऐसे मामलों में सरकारी कर्मचारी होने के नाते आरोपी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी होनी चाहिए और रेलवे प्रशासन को इसमें स्वतः संज्ञान लेना चाहिए।

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