नोएडा/गाजियाबाद: चिकित्सा जैसे पवित्र पेशे को शर्मसार करने वाला एक बड़ा मामला सामने आया है। सीबीआई (CBI) ने नोएडा के सेक्टर 137 स्थित फेलिक्स अस्पताल में छापेमारी कर एक सेवानिवृत्त मेजर और अस्पताल के एजीएम (AGM) को रिश्वत के लेन-देन के आरोप में रंगे हाथ गिरफ्तार किया है।
साजिश का पर्दाफाश: ‘कमीशन’ के खेल में मरीज बने माध्यम
सीबीआई की जांच में यह सनसनीखेज खुलासा हुआ है कि एटा स्थित ईसीएचएस (ECHS) पॉलीक्लिनिक में तैनात मेडिकल ऑफिसर डॉ. आशीष शाक्य (सेवानिवृत्त मेजर) ने फेलिक्स अस्पताल के प्रबंधन के साथ मिलकर एक ‘रैकेट’ चलाया था। आरोप है कि डॉ. शाक्य बिना किसी ठोस चिकित्सीय कारण के मरीजों को फेलिक्स अस्पताल रेफर करते थे, ताकि अस्पताल को ज्यादा से ज्यादा सरकारी भुगतान वाले मरीज मिल सकें। इसके बदले में अस्पताल प्रबंधन उन्हें मोटी रिश्वत देता था।
तीन लाख की रिश्वत और रंगे हाथ गिरफ्तारी
सीबीआई के अनुसार, यह कार्रवाई 15 मार्च को की गई। डॉ. शाक्य ने 11 मार्च को फेलिक्स अस्पताल के अधिकारियों से अपनी ‘पेंडिंग’ रिश्वत की मांग की थी। 14 मार्च को नोएडा में मुलाकात तय हुई और 15 मार्च को जैसे ही सेक्टर 137 स्थित अस्पताल के कॉन्फ्रेंस रूम में एजीएम बिजेंद्र सिंह ने डॉ. शाक्य को 3 लाख रुपये सौंपे, सीबीआई की टीम ने दोनों को दबोच लिया। मौके से रिश्वत की पूरी रकम बरामद कर ली गई है।
सीबीआई की कार्रवाई और कोर्ट का आदेश
- दर्ज मामला: 15 मार्च को दिल्ली में सीबीआई ने आधिकारिक मुकदमा दर्ज किया।
- गिरफ्तारी: डॉ. आशीष शाक्य और एजीएम बिजेंद्र सिंह को गिरफ्तार किया गया।
- पुलिस रिमांड: सीबीआई ने कोर्ट से एक सप्ताह की रिमांड मांगी थी, लेकिन अदालत ने तीन दिन की पुलिस कस्टडी रिमांड मंजूर की है।
- अगली पेशी: 19 मार्च को दोनों आरोपियों को दोबारा विशेष सीबीआई कोर्ट में पेश किया जाएगा।
जांच के घेरे में अस्पताल प्रबंधन
सीबीआई का मानना है कि यह भ्रष्टाचार केवल दो व्यक्तियों तक सीमित नहीं है। मामले की जांच अभी शुरुआती दौर में है और अस्पताल के कई अन्य बड़े अधिकारियों की भूमिका की जांच की जा रही है। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि अब तक इस मिलीभगत से कितने मरीजों को अवैध रूप से रेफर किया गया और इसके जरिए कितने रुपये का गबन हुआ।
फेलिक्स अस्पताल (Felix Hospital) का परिचय
फेलिक्स अस्पताल नोएडा के सेक्टर 137 में स्थित एक प्रमुख मल्टी-स्पेशियलिटी अस्पताल है। यह अस्पताल मुख्य रूप से अपनी अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाओं, आपातकालीन सेवाओं और विभिन्न स्वास्थ्य बीमा (TPA) व सरकारी पैनलों (जैसे ECHS, CGHS) के साथ जुड़ाव के लिए जाना जाता है। हालांकि, हालिया सीबीआई कार्रवाई ने इसकी साख और प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

