सीएम योगी आज अचानक वाराणसी पहुंचे और मणिकर्णिका घाट का निरीक्षण किया। इसके बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने स्पष्ट किया कि घाट पर कोई मंदिर या मूर्ति तोड़ी नहीं जा रही, बल्कि पुराने ढांचों का कायाकल्प और पुनरुद्धार किया जा रहा है। उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस और कुछ लोग AI से बने फर्जी कंटेंट का सहारा लेकर अफवाहें फैला रहे हैं।
विवाद की शुरुआत
पिछले सप्ताह मणिकर्णिका घाट पर पुनर्विकास परियोजना के तहत बुलडोजर से कुछ पुराने चबूतरे और संरचनाओं को तोड़े जाने के वीडियो वायरल हुए। इनमें महारानी अहिल्याबाई होल्कर की प्रतिमा सहित कई देवी-देवताओं की मूर्तियों के क्षतिग्रस्त होने के दावे किए गए। स्थानीय लोगों और कुछ संगठनों ने प्रदर्शन किया, आरोप लगाया कि धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं और ऐतिहासिक धरोहर को नुकसान पहुंचाया गया। विपक्षी दलों, खासकर कांग्रेस ने सरकार पर हमला बोला और इसे संवेदनहीनता करार दिया।
प्रशासन का स्पष्टीकरण
वाराणसी के जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने पहले ही साफ किया था कि विकास कार्य के दौरान कोई मूर्ति क्षतिग्रस्त नहीं हुई। मलबे में मिली सभी मूर्तियां और कलाकृतियां संस्कृति विभाग द्वारा सुरक्षित रखी गई हैं और पुनर्निर्माण के बाद ससम्मान पुनर्स्थापित की जाएंगी। नगर निगम के 25 करोड़ रुपये के इस प्रोजेक्ट को घाट के सुंदरीकरण और श्रद्धालुओं की सुविधा बढ़ाने के लिए बताया गया है। बीजेपी विधायकों और वाराणसी मेयर ने भी आरोपों को राजनीतिक साजिश करार दिया।
ताजा स्थिति
सीएम योगी के दौरे और बयान के बाद विवाद पर सरकार का पक्ष मजबूत नजर आ रहा है। घाट पर विकास कार्य जारी हैं, और प्रशासन का दावा है कि सब कुछ स्थानीय लोगों की सहमति से हो रहा है। हालांकि, कुछ सोशल मीडिया पोस्ट और विरोधी आवाजें अभी भी मूर्तियों के नुकसान के दावे कर रही हैं।
यह मामला काशी की धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व को देखते हुए संवेदनशील बना हुआ है। प्रशासन ने अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी भी दी है।

