UP-ATS की बड़ी कार्रवाई: उत्तर प्रदेश की एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (ATS) ने एक बड़ी आतंकी साजिश को नाकाम करते हुए पाकिस्तानी हैंडलर्स से जुड़े एक खतरनाक मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया है। 2 अप्रैल 2026 को लखनऊ रेलवे स्टेशन के पास रेलवे सिग्नल बॉक्स में आगजनी और विस्फोट की योजना को अंजाम देने से ठीक पहले ATS ने मौके पर पहुंचकर गिरोह के चारों सदस्यों को धर दबोचा।
कौन हैं गिरफ्तार आरोपी?
उत्तर प्रदेश एटीएस ने साकिब उर्फ डेविल (25 वर्ष) पुत्र शकील अहमद, अरबाब (20 वर्ष) पुत्र रहीशुद्दीन निवासी अगवानपुर, थाना परीक्षितगढ़, मेरठ तथा विकास गहलावत उर्फ रौनक (27 वर्ष) और लोकेश उर्फ पपला पंडित (19 वर्ष) निवासी रामविहार कॉलोनी, छपरौला, गौतम बुद्ध नगर को गिरफ्तार किया है।
नाई की दुकान और देश के खिलाफ जंग
ATS के अनुसार, मुख्य आरोपी साकिब उर्फ ‘डेविल’ मेरठ में नाई का काम करता था, लेकिन सोशल मीडिया टेलीग्राम, सिग्नल और इंस्टाग्राम के ज़रिए पाकिस्तानी हैंडलर्स से लगातार संपर्क में था। हैंडलर ओसामा बिन लादेन, फरहतुल्ला गौरी, कश्मीर मुजाहिद्दीन और गज़वा-ए-हिंद जैसे नामों का इस्तेमाल कर साकिब को धर्म के नाम पर वाहनों और सार्वजनिक संपत्ति को जलाने के लिए उकसाते थे। साकिब ने अपने गांव के अरबाब और गौतमबुद्धनगर के विकास गहलावत व लोकेश उर्फ पपला पंडित को पैसों के लालच में इस गिरोह में शामिल किया था।
गूगल लोकेशन से रेकी, QR कोड से पेमेंट
ATS ने बताया कि आरोपी राजनीतिक व्यक्तियों और महत्वपूर्ण संस्थानों की रेकी कर उसकी जानकारी पाकिस्तानी हैंडलर्स तक पहुंचाते थे। गिरोह ने गाजियाबाद, अलीगढ़ और लखनऊ में कई प्रतिष्ठित स्थानों और रेलवे संपत्तियों की रेकी की थी। पाकिस्तानी हैंडलर्स द्वारा गूगल लोकेशन भेजी जाती थी, जिसके आधार पर टारगेट तय किए जाते थे। आगजनी की घटनाओं को अंजाम देने के बाद आरोपी वीडियो बनाकर पाकिस्तानी हैंडलर्स को भेजते थे और बदले में QR कोड के माध्यम से पैसे मंगाए जाते थे।
रेलवे से लेकर गैस ट्रक तक निशाने पर था सब
गिरोह पर आरोप है कि यह रेलवे सिग्नल बॉक्स को नष्ट करने, गैस सिलेंडर से भरे ट्रकों में आग लगाने और राजनीतिक हस्तियों को निशाना बनाने की साजिश रच रहा था। इनका मकसद देश में भय का माहौल पैदा करना और आर्थिक नुकसान पहुंचाना था।
बरामदगी और आगे की जांच
गिरफ्तार आरोपियों के पास से एक ज्वलनशील पदार्थ से भरा कैन, 7 स्मार्टफोन, 24 पर्चे/पम्पलेट और पहचान दस्तावेज बरामद किए गए। यही डिजिटल और भौतिक सामग्री अब जांच की सबसे अहम कड़ी मानी जा रही है, क्योंकि इन्हीं से नेटवर्क, संपर्क और संभावित टार्गेट्स की और जानकारी निकल सकती है।
ATS को प्राप्त खुफिया जानकारी के अनुसार आरोपी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे टेलीग्राम, इंस्टाग्राम और सिग्नल के माध्यम से पाकिस्तानी हैंडलर्स, कई कट्टरपंथी समूहों और अफगानिस्तान के कुछ नंबरों से भी जुड़े हुए थे। फिलहाल ATS गहन पूछताछ जारी रखे हुए है और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य सदस्यों व अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन की तलाश में जुटी है। यह कार्रवाई एक बड़े हमले को टालने में कामयाब रही लेकिन यह भी साफ कर गई कि दुश्मन देश की साजिशें अब शहरों की गलियों तक पहुंच चुकी हैं।

