बंगाल चुनाव 2026 से पहले बड़े विवाद: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की तैयारी में दो अलग-अलग लेकिन चुनावी प्रक्रिया पर सवाल खड़े करने वाले मामले एक साथ सामने आए हैं। उत्तर 24 परगना के बसिरहाट नॉर्थ विधानसभा क्षेत्र के बोरो गोबरा गांव (बूथ नंबर 5) में एक साथ 340 मुस्लिम वोटरों के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए। इनमें बूथ लेवल अधिकारी (BLO) मो. शफीउल आलम का नाम भी शामिल है। वहीं, देशभर में कांग्रेस के सांसदों-विधायकों का BJP में जाना जारी है—पिछले 10 साल में 200 से ज्यादा विधायक-सांसद BJP में शामिल हुए, जिनमें 40% कांग्रेस से आए। दोनों घटनाएं चुनाव से ठीक पहले ‘वोटर लिस्ट में हेराफेरी’ और ‘राजनीतिक पलायन’ के मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठा रही हैं।
वोटर लिस्ट विवाद का पूरा मामला:
चुनाव आयोग की विशेष गहन समीक्षा (SIR) के तहत तैयार ड्राफ्ट रोल में इन 340 वोटरों को ‘अंडर एडजुडिकेशन’ (समीक्षा के अधीन) चिह्नित किया गया था। 23 मार्च को जारी पहले सप्लीमेंट्री लिस्ट में इनके नाम पूरी तरह हटा दिए गए। बूथ में कुल 992 वोटर हैं, जिनमें सामान्य रूप से 38 नाम (मृत्यु/स्थानांतरण) हटे थे, लेकिन ये 340 नाम सब मुस्लिम समुदाय के हैं।
प्रभावित वोटर काजीरुल मोंडल ने कहा, “चुनाव आयोग को सिर्फ 11 वैध दस्तावेजों में से एक की जरूरत होती है, लेकिन कई लोगों ने तीन-चार दस्तावेज जमा किए थे। फिर भी नाम काट दिए गए।” BLO शफीउल आलम ने भी दस्तावेज अपलोड करने में मदद की थी, लेकिन उनका अपना नाम भी हटा दिया गया। सैकड़ों ग्रामीणों ने BLO के घर और सड़कों पर प्रदर्शन किया। वे आरोप लगा रहे हैं कि यह सामुदायिक आधार पर टारगेटेड हटाया गया है और चुनाव आयोग पर ‘राजनीतिक दबाव’ का आरोप लगाया जा रहा है। आलम ने अब ट्रिब्यूनल में अपील करने का ऐलान किया है।
कांग्रेस से BJP में ‘कांग्रेस-मुक्त भारत से कांग्रेस-युक्त BJP’ की ओर:
दूसरी ओर, कांग्रेस के नेता चुनाव से ठीक पहले BJP में शामिल हो रहे हैं। हाल ही में असम के नागांव सांसद प्रद्युत बोर्डोलोई ने हिमंता बिस्वा सरमा पर तीखा हमला किया था, लेकिन मार्च 2026 में BJP में शामिल हो गए। असम में BJP के एक-तिहाई उम्मीदवार पहले कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ चुके हैं। पूरे देश में पिछले 10 साल में 200 से ज्यादा विधायक-सांसद BJP में आए, जिनमें कांग्रेस के करीब 40% शामिल हैं। 2024 लोकसभा में BJP के 100 से ज्यादा उम्मीदवार कांग्रेस से आए थे।
विश्लेषकों का कहना है कि यह सिर्फ एक पार्टी का पतन और दूसरे का उदय नहीं, बल्कि BJP द्वारा कांग्रेस के पूरे ‘पॉलिटिकल इकोसिस्टम’ को आत्मसात करने की प्रक्रिया है—नेता, नेटवर्क और वोट बैंक सब। असम सीएम हिमंता बिस्वा सरमा खुद कांग्रेस छोड़कर BJP में आए थे। ऐसे पलायन चुनाव से पहले आम हो गए हैं और वोटरों के मैंडेट को कमजोर करते हैं।
ताजा अपडेट (26 मार्च 2026):
बसिरहाट में प्रदर्शन जारी। स्थानीय लोगों ने ब्लॉक डेवलपमेंट अधिकारी और इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन अधिकारी से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन कोई ठोस जवाब नहीं मिला। पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया में कुल 60 लाख से ज्यादा नामों पर समीक्षा चल रही है, जिसमें मुस्लिम बहुल इलाकों (मालदा, मुर्शिदाबाद, उत्तर 24 परगना) पर सबसे ज्यादा असर पड़ा है। चुनाव आयोग ने अभी तक इस बूथ पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं दिया है। कांग्रेस-Left गठबंधन पर सस्पेंस बरकरार है, जबकि TMC और BJP दोनों ने डिफेक्टरों को उम्मीदवार बनाने की रणनीति अपनाई है। BJP की दूसरी लिस्ट में कई पूर्व कांग्रेस/TMC नेता शामिल हैं।
ये दोनों घटनाएं 2026 के बंगाल चुनाव को लेकर सवाल उठा रही हैं—वोटर लिस्ट की पारदर्शिता और राजनीतिक दलों की स्थिरता पर। विपक्ष ‘टारगेटेड वोटर हटाने’ का आरोप लगा रहा है, जबकि सत्ता पक्ष इसे नियमित समीक्षा बता रहा है। चुनाव आयोग से पूर्ण पारदर्शिता और शीघ्र स्पष्टीकरण की मांग बढ़ रही है। अभी तक कोई नया आधिकारिक बयान या EC की कार्रवाई सामने नहीं आई है। आगे की जानकारी मिलते ही अपडेट किया जाएगा।

