कांग्रेस को बड़ा झटका: असम में आगामी विधानसभा चुनावों (अप्रैल 2026) से ठीक पहले कांग्रेस को एक और गहरा झटका लगा है। नगांव लोकसभा सीट से कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद और पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई के करीबी सहयोगी प्रद्युत बोरदोलोई ने 17 मार्च 2026 को पार्टी से इस्तीफा दे दिया। इस्तीफे के साथ ही अटकलें तेज हो गई हैं कि वे जल्द ही भाजपा में शामिल हो सकते हैं। बोरदोलोई ने बुधवार को असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और राज्य भाजपा अध्यक्ष दिलीप सैकिया की उपस्थिति में पार्टी की सदस्यता ग्रहण की।
बोरदोलोई ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को संबोधित अपने त्यागपत्र में लिखा, “अत्यधिक दुख के साथ आज मैं भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सभी पदों, विशेषाधिकारों और प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देता हूं।” उन्होंने पार्टी में अपमान और टिकट वितरण को लेकर असंतोष जताया है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, लाहोरीघाट विधानसभा सीट पर डॉ. आसिफ मोहम्मद नजर को टिकट देने के फैसले पर बोरदोलोई ने पहले ही विरोध जताया था, जिससे पार्टी में तनाव बढ़ गया था।
यह घटना पिछले एक महीने में कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेन कुमार बोरा के भाजपा में शामिल होने के बाद दूसरा बड़ा झटका है। असम में कांग्रेस के पास वर्तमान में लोकसभा की सिर्फ तीन सीटें हैं, और बोरदोलोई का जाना पार्टी की स्थिति को और कमजोर कर सकता है। बोरदोलोई दो बार के सांसद हैं और मार्गेरिटा से पूर्व विधायक रह चुके हैं। वे पार्टी के घोषणा-पत्र समिति के पूर्व अध्यक्ष भी रह चुके हैं।
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने 17 मार्च को ही बोरदोलोई को खुलेआम भाजपा में आने का न्योता दिया था। उन्होंने कहा था, “यदि प्रद्युत बोरदोलोई भाजपा में आते हैं, तो उन्हें उचित सम्मान दिया जाएगा और विधानसभा चुनाव में टिकट भी दिया जा सकता है।” सरमा ने यह भी कहा कि “कोई सनातनी हिंदू कांग्रेस में नहीं रह सकता” और बोरा की तरह बोरदोलोई को भी पार्टी में जगह मिलेगी, और वे गुवाहाटी या आसपास की किसी सीट से चुनाव लड़ सकते हैं।
कांग्रेस ने इस घटना को कम करके आंकने की कोशिश की है। एआईसीसी के असम प्रभारी जितेंद्र सिंह ने कहा, “बोरदोलोई के नसों में कांग्रेस का खून है, हम एक परिवार हैं और रहेंगे।” जबकि असम कांग्रेस प्रमुख गौरव गोगोई ने आरोप लगाया कि बोरदोलोई को राजनीतिक रूप से निशाना बनाया जा रहा है। प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी कहा कि टिकट वितरण पर असहमति के कारण यह दुर्भाग्यपूर्ण कदम उठाया गया।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि असम में भाजपा की मजबूत स्थिति को देखते हुए ऐसे बड़े नेताओं का आना पार्टी को और मजबूती देगा, खासकर नगांव और ऊपरी असम में। कांग्रेस के लिए यह आंतरिक कलह और एकजुटता की कमी का संकेत है, जो चुनावी तैयारी को प्रभावित कर सकता है।

