Major attack in SIR controversy: विपक्ष ने जुटाए 180+ हस्ताक्षर, CEC के खिलाफ महाभियोग नोटिस जल्द

Major attack in SIR controversy: विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने की प्रक्रिया तेज कर दी है। इंडिया गठबंधन की अगुवाई में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नेतृत्व में यह कदम उठाया जा रहा है, और अब तक लोकसभा में लगभग 120 तथा राज्यसभा में 60 से अधिक सांसदों (कुल 180+) ने नोटिस पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। सूत्रों के अनुसार, नोटिस जल्द ही लोकसभा स्पीकर और राज्यसभा सभापति को सौंपा जा सकता है, संभवतः गुरुवार या शुक्रवार तक।

यह कदम मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया से जुड़े विवाद पर आधारित है, जिसमें विपक्ष का आरोप है कि लाखों मतदाताओं (खासकर 60-64 लाख नामों पर सवाल) को वोटर लिस्ट से हटाने या संदिग्ध बनाने की कोशिश की गई, जिससे बड़े पैमाने पर मतदाताओं को वंचित करने की आशंका है। विपक्ष के सात प्रमुख आरोपों में “पक्षपातपूर्ण व्यवहार”, “चुनावी धांधली की जांच में रुकावट” और “मतदाताओं के अधिकारों का हनन” शामिल हैं। TMC सांसदों के नेतृत्व में यह अभियान चल रहा है, जिसमें कांग्रेस, सपा, आप और अन्य दल शामिल हैं।

महाभियोग की प्रक्रिया क्या है?
संविधान के अनुच्छेद 324(5) के तहत मुख्य चुनाव आयुक्त को सुप्रीम कोर्ट के जज की तरह ही हटाया जा सकता है। इसके लिए, लोकसभा में कम से कम 100 सांसदों या राज्यसभा में 50 सांसदों के हस्ताक्षर जरूरी। नोटिस देने के बाद सदन के स्पीकर/सभापति इसे विचार के लिए स्वीकार कर सकते हैं या अस्वीकार। अगर स्वीकार हुआ, तो जांच समिति गठित हो सकती है, और बहुमत से प्रस्ताव पास होने पर राष्ट्रपति हटा सकते हैं।

विपक्ष का दावा है कि यह पहली बार है जब किसी CEC के खिलाफ ऐसा प्रस्ताव लाया जा रहा है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि प्रक्रिया लंबी चल सकती है—महीनों लग सकते हैं—और तब तक पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और पुडुचेरी जैसे राज्यों में विधानसभा चुनाव (2026 की शुरुआत में संभावित) खत्म हो सकते हैं।

CEC का पक्ष
ज्ञानेश कुमार ने हाल ही में कोलकाता में प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि कोई योग्य मतदाता वोटर लिस्ट से नहीं हटाया जाएगा, SIR का उद्देश्य लिस्ट को “शुद्ध” रखना है, और चुनाव स्वतंत्र, निष्पक्ष व शांतिपूर्ण होंगे। उन्होंने विपक्ष के आरोपों पर सीधे टिप्पणी से इनकार किया। यह राजनीतिक टकराव लोकतंत्र की संस्थाओं पर सवाल उठा रहा है, और संसद के मौजूदा सत्र में लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव के बाद यह दूसरा बड़ा मुद्दा बन गया है। विपक्षी नेता डेरेक ओ’ब्रायन ने कहा कि लड़ाई संसद के अंदर और बाहर जारी रहेगी।

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