UP ATS और CBI का बड़ा एक्शन: नोएडा-मेरठ में फर्जी टेलीफोन एक्सचेंज का भंडाफोड़, VoIP से छिपाई जाती थी पहचान

UP ATS और CBI का बड़ा एक्शन: उत्तर प्रदेश में साइबर अपराध के खिलाफ चल रहे अभियान के तहत ATS, CBI और स्थानीय पुलिस ने मिलकर कई अवैध टेलीफोन एक्सचेंज ध्वस्त किए हैं। इस पूरे रैकेट में SIM Box तकनीक का इस्तेमाल कर अंतरराष्ट्रीय कॉल को लोकल कॉल में बदला जाता था, जिससे ठगों की पहचान छिपी रहती थी।

CBI की कार्रवाई — मेरठ व नोएडा में 6 स्थानों पर छापे

27 मार्च 2026 को CBI ने मेरठ और नोएडा में छह ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। गिरफ्तार किए गए आरोपी एक कंपनी के निदेशक थे, जिसे जनवरी 2025 में वैध कारोबार के नाम पर बनाया गया था लेकिन असल में यह साइबर ठगी के लिए बड़े पैमाने पर SIM कार्ड जुटाने का जरिया था। जांच में पता चला कि इन आरोपियों ने कर्मचारियों के नाम पर कम से कम 108 SIM कार्ड हासिल किए और उन्हें SIM Box उपकरणों में लगाकर VoIP कॉल को भारतीय मोबाइल नंबरों के जरिए रूट किया। इस तकनीक से कॉल करने वाले की असली पहचान छिप जाती थी और ठग फिशिंग, ‘डिजिटल अरेस्ट’ स्कैम, निवेश धोखाधड़ी जैसे अपराध सस्ते में और बेखौफ होकर कर सकते थे।

मेरठ में 6 गिरफ्तार  पाकिस्तान और खाड़ी देशों से आती थीं कॉल

मेरठ के लिसाड़ी गेट क्षेत्र के समर गार्डन इलाके में छापेमारी कर पुलिस ने फरदीन, नाजिम उर्फ फुरकान, फहीम, सुल्तान, शादाब और रहीस को गिरफ्तार किया। पूछताछ में सामने आया कि ये भोले-भाले लोगों के नाम पर फर्जी तरीके से सिम कार्ड निकलवाते थे और उन्हें VoIP GSM गेटवे मशीनों में लगाकर विदेशी कॉल को लोकल कॉल में बदल देते थे। पाकिस्तान से लेकर खाड़ी देशों में बैठे लोग इनकी सेवा लेते थे।

कैसे काम करता है यह धंधा?

आरोपी SIM Box उपकरणों का इस्तेमाल कर अंतरराष्ट्रीय VoIP कॉल को स्थानीय मोबाइल कॉल में बदल देते थे, जिससे कॉल का स्रोत पकड़ में नहीं आता था। इससे न केवल कॉल करने वालों की पहचान छिपती थी बल्कि टेलीकॉम कंपनियों को भारी राजस्व नुकसान भी होता था। नोएडा के एक मामले में जांच में खुलासा हुआ कि इस फर्जी एक्सचेंज से दुबई, सऊदी अरब और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों से आने वाली कॉल को भारत में लोकल कॉल बनाकर ट्रांसफर किया जाता था। प्रति कॉल कंपनियों को 10 रुपये तक और सरकार को 7 पैसे का नुकसान होता था।

हवाला और राष्ट्रीय सुरक्षा को भी खतरा

जांच एजेंसियां इस बात की भी पड़ताल कर रही हैं कि क्या इस नेटवर्क में शामिल विदेशी तत्व VoIP कॉल का इस्तेमाल भारतीय खुफिया एजेंसियों की निगाहों से बचकर देश में विध्वंसक गतिविधियों के लिए कर रहे थे।  हवाला और धमकी देने वाले कॉल किए जाने के भी इनपुट मिले हैं।

क्या करें नागरिक?

CBI ने नागरिकों से अपील की है कि संदिग्ध कॉल या साइबर ठगी की जानकारी तुरंत cybercrime.gov.in पोर्टल या हेल्पलाइन नंबर 1930 पर दें।

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