आरोपित कंपनियां और गबन की रकम
तहरीर में पांच कंपनियों पर मुख्य आरोप लगाए गए हैं, जिन्होंने राशि जमा नहीं की:
• मेसर्स राजश्री: 17.88 लाख + 14.31 लाख रुपये
• स्वच्छकार इंटरप्राइजेज: 3.57 करोड़ रुपये (कई चालान)
• पटवा एसोसिएट: 3.57 लाख रुपये
• ड्रैगन सिक्योरिटी: 10.73 लाख रुपये
• आर्यन सिक्योरिटी: 10.73 लाख रुपये
इसके अलावा शार्क सिक्योरिटी (25 लाख), ईगल हंटिंग (28.62 लाख) आदि का भी जिक्र है, लेकिन मुख्य तहरीर में करीब 64 लाख की रिकवरी बाकी कंपनियों से मांगी गई है।
लॉयन सिक्योरिटी क्यों बाहर?
लॉयन सिक्योरिटी और उससे जुड़ी कुछ फर्मों का नाम तहरीर में नहीं शामिल किया गया। नगर निगम का दावा है कि इन कंपनियों ने गबन की रकम वापस जमा करवा दी है। हालांकि, सवाल उठ रहे हैं कि घोटाला पकड़े जाने के बावजूद इन कंपनियों को ब्लैकलिस्ट क्यों नहीं किया गया? बल्कि शहर के तीन प्रमुख जोनों में कूड़ा उठान और रोड स्वीपिंग का ठेका भी दे दिया गया।
ताजा स्थिति और उठते सवाल
• NSA की तहरीर के बाद पुलिस FIR दर्ज करने की प्रक्रिया में है, लेकिन अभी मुकदमा दर्ज होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई।
• लोक लेखा समिति ने सभी कार्यदायी संस्थाओं से सख्त रिकवरी की पैरवी की थी।
• विशेषज्ञों और कर्मचारी संगठनों का कहना है कि भ्रष्टाचार उजागर तो हुआ, लेकिन जिम्मेदारों पर ठोस कार्रवाई और बाकी रकम की वसूली कब होगी, यह बड़ा सवाल है।
• क्या नगर निगम कुछ कंपनियों को बचाने की कोशिश कर रहा है? यह भी जांच का विषय बना हुआ है।
यह मामला छोटे-मोटे कर्मचारियों के भविष्य से जुड़ा है, जिनकी मेहनत की कमाई ठेकेदारों ने हड़प ली। नगर निगम प्रशासन से पारदर्शी जांच और तेज कार्रवाई की मांग तेज हो रही है।
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