LPG संकट की मार: मध्य-पूर्व में जारी युद्ध की आग अब भारत के औद्योगिक शहरों तक पहुंच गई है। नोएडा और ग्रेटर नोएडा में LPG संकट इतना गहरा गया है कि फैक्ट्रियों में ताले लग रहे हैं और मजदूर रोजी-रोटी की तलाश में अपने गांवों की ओर लौटने लगे हैं।
संकट की जड़ कहां है?
अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध के कारण वैश्विक गैस आपूर्ति श्रृंखला बाधित हुई है, जिसके चलते पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने कॉमर्शियल सिलेंडरों के वितरण पर अस्थाई रोक लगा दी है। IGL की ओर से जारी संदेश के अनुसार 11 मार्च से उद्योग और कॉमर्शियल सेक्टर को केवल 80 प्रतिशत तक ही गैस आपूर्ति की जा रही है।
उद्योगों पर असर
जिले में चार लाख से अधिक PNG कनेक्शन धारक हैं, जबकि 35 हजार से ज्यादा MSME इकाइयां गैस पर निर्भर हैं। गैस आपूर्ति बाधित होने के कारण इन इकाइयों के सामने उत्पादन जारी रखना बड़ी चुनौती बन गया है। पैकेजिंग, फूड प्रोसेसिंग, सिलिकॉन मैन्युफैक्चरिंग समेत कई क्षेत्रों के उद्योग बुरी तरह प्रभावित हैं। छोटे होटल, रेस्टोरेंट और कैटरिंग कारोबार भी इस संकट से अछूते नहीं हैं — कुछ प्रतिष्ठान दूसरों से उधार गैस लेकर काम चला रहे हैं, जबकि कुछ को ब्लैक मार्केट से महंगे दाम पर सिलेंडर खरीदने पड़ रहे हैं।
मजदूरों का दर्द
नोएडा-ग्रेटर नोएडा में अधिकांश दिहाड़ी मजदूर बिहार, बंगाल, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों से आते हैं। ये लोग किराए के छोटे-छोटे कमरों में रहते हैं और खुले बाजार से छोटे सिलेंडर में गैस भरवाकर अपना काम चलाते थे, लेकिन अब यही व्यवस्था उनके लिए परेशानी का कारण बन गई है। प्रमुख लेबर चौक, सेक्टर 62, हरौला, भंगेल, सूरजपुर, कासना और दनकौर जैसे इलाकों में जहां सुबह होते ही सैकड़ों मजदूर काम की तलाश में खड़े होते थे, वहां अब उनकी संख्या लगातार घटती जा रही है।
ब्लैक मार्केट में सिलेंडर 6,000 रुपये तक
लोगों का कहना है कि जो सिलेंडर सामान्य कीमत पर मिलना चाहिए, उसे ब्लैक मार्केट में 5 से 6 हजार रुपये में सरेआम बेचा जा रहा है। एक महीने पहले बुकिंग कराने के बाद भी लोगों को सिलेंडर नहीं मिल पा रहा और वे दर-दर भटकने को मजबूर हैं। छोटे ठेलों पर मिलने वाली 5-10 रुपये की चाय अब 20 रुपये में बिक रही है, क्योंकि दुकानदारों को महंगे दाम पर ब्लैक में गैस खरीदनी पड़ रही है।
छात्र भी परेशान
ग्रेटर नोएडा के नॉलेज पार्क क्षेत्र में विभिन्न हॉस्टलों और PG में रहने वाले करीब 50 हजार से अधिक छात्र भी इस संकट की चपेट में हैं। हॉस्टलों, कैंटीनों और रेस्टोरेंट में खाना बनाने की व्यवस्था को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
मजदूर संगठनों की मांग
भारतीय मजदूर संघ ने सरकार से मांग की है कि उद्योगों को चलाने के लिए पर्याप्त गैस एवं पेट्रोलियम पदार्थों की आपूर्ति तुरंत बहाल की जाए और पलायन कर रहे मजदूरों को आपातकाल स्थिति मानकर आर्थिक सहायता प्रदान की जाए। फिलहाल केंद्र सरकार का कहना है कि देश में LPG आपूर्ति की स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन जमीनी हालात इससे बिल्कुल उलट तस्वीर पेश कर रहे हैं।

