नोएडा हाईटेक और नियोजित शहर (Planned City) के रूप में बसाए गए नोएडा में लैंड यूज (भूमि उपयोग) के नियमों का सरेआम उल्लंघन हो रहा है। ऐसा लगने लगा है कि प्राधिकरण जानकर भी अंजान बना है। शहर के प्रमुख औद्योगिक फेज-1 के सेक्टर 3, 4, 5, 9 और 10 जैसे क्षेत्रों में, जो मूल रूप से फैक्ट्रियों और उद्योगों के लिए आवंटित किए गए थे, बड़े पैमाने पर अवैध व्यावसायिक (कमर्शियल) गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। यह खेल लंबे समय से नोएडा प्राधिकरण की नाक के नीचे चल रहा है। प्राधिकरण ऐसी फैक्ट्रियों पर कार्रवाई भी करता है मगर सांठगांठ के चलते मामला जस का तस बना है। काफी फैक्ट्रियों मालिक ऐसे है कि उन पर भूखंड रद्द करने की कार्रवाई भी की गई लेकिन सर्वे के बाद उन्होंने फिर से फैक्ट्रियों कमर्शियल गतिविधियां संचालित कर रहे है।
क्या है जमीनी हकीकत?
बता दें कि नियमों के हिसाब से औद्योगिक सेक्टरों में केवल विनिर्माण (Manufacturing), आईटीध्आईटीईएस या प्रोसेसिंग से जुड़ी इकाइयों को ही अनुमति है। लेकिन जमीनी स्तर पर पड़ताल करने और
स्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, सेक्टर 3, 4, 5, 9 और 10 के औद्योगिक भूखंडों पर निम्नलिखित अवैध गतिविधियां चल रही हैं:
- रिटेल स्टोर और शोरूम: कपड़ों, जूतों, इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑटोमोबाइल के बड़े-बड़े शोरूम खुल गए हैं।
- रेस्टोरेंट और क्लाउड किचन: बिना उचित कमर्शियल एफएआर (FAR) और फायर एनओसी के रेस्टोरेंट और कैफे चल रहे हैं।
- बैंक्वेट हॉल और सर्विस सेंटर: औद्योगिक शेड्स को सजाकर उन्हें पार्टी हॉल, बैंक और बड़े सर्विस सेंटर्स में तब्दील कर दिया गया है।
मिक्स लैंड यूज पॉलिसी का दुरुपयोग
प्राधिकरण के सूत्रों के अनुसार, नोएडा में मिक्स लैंड यूज (Mix Land Use) पॉलिसी लागू है। इसके तहत कुछ नियमों और शुल्कों के भुगतान के बाद आवंटित भूखंड के कुल निर्मित क्षेत्र (FAR) के अधिकतम 25% हिस्से पर ही व्यावसायिक गतिविधि की अनुमति मिल सकती है (जैसे ऑटो शोरूम आदि)।
बड़ा उल्लंघन: नियमों का फायदा उठाकर आवंटियों ने कागजों पर 25% की मंजूरी ली हुई है, लेकिन मौके पर 100% भूखंड का उपयोग पूर्णतः व्यावसायिक किया जा रहा है। इससे प्राधिकरण को करोड़ों रुपये के राजस्व (कमर्शियल भूखंड आवंटन से होने वाली आय) का चूना लग रहा है।
हाल ही में नोएडा प्राधिकरण ने इस दुरुपयोग को रोकने और राजस्व बढ़ाने के लिए मिक्स लैंड यूज परिवर्तन शुल्क को वर्तमान 10% से बढ़ाकर 50% (आवासीय/औद्योगिक और कमर्शियल दरों के अंतर का) करने की तैयारी भी शुरू की है, ताकि अवैध रूप से कमर्शियल इस्तेमाल करने वालों पर लगाम कसी जा सके।
गंभीर संकट: ट्रैफिक जाम और सुरक्षा को खतरा
औद्योगिक क्षेत्रों के अनधिकृत कमर्शियल हब में बदलने से शहर का बुनियादी ढांचा चरमरा गया है:
- पार्किंग और ट्रैफिक जाम: औद्योगिक सेक्टरों की सड़कें कमर्शियल ग्राहकों की गाड़ियों से भरी रहती हैं, जिससे दिनभर जाम की स्थिति बनी रहती है।
- फायर सेफ्टी का उल्लंघन: औद्योगिक भवनों का ढांचा शोरूम और रेस्टोरेंट के अनुकूल नहीं होता। पर्याप्त आपातकालीन निकास न होने से यहां हमेशा बड़े हादसे का डर बना रहता है।
प्राधिकरण का रुख: आवंटन रद्दीकरण की चेतावनी
विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स और हालिया घटनाक्रमों के अनुसार, नोएडा प्राधिकरण अब अवैध लैंड यूज और निष्क्रिय पड़े भूखंडों को लेकर सख्त रुख अपना रहा है। हाल ही में प्राधिकरण ने वर्षों से नियमों का उल्लंघन करने वाले या नियम विरुद्ध निर्माण न करने वाले कई औद्योगिक भूखंडों का आवंटन रद्द कर दिया है। प्राधिकरण के अधिकारियों का स्पष्ट संदेश है कि— “आवंटित भूखंडों का उपयोग उसी मूल उद्देश्य के लिए करें जिसके लिए वे दिए गए हैं, अन्यथा लीज डीड रद्द कर दी जाएगी।”
जानकारों का कहना है कि यदि प्राधिकरण ने सेक्टर 3, 4, 5, 9 और 10 के इन औद्योगिक भूखंडों पर औचक निरीक्षण और सीलिंग की ठोस कार्रवाई नहीं की, तो नोएडा का मास्टर प्लान पूरी तरह ध्वस्त हो जाएगा।
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