
वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने याचिकाकर्ता की ओर से बहस शुरू की और प्रदर्शन से जुड़े एक वीडियो को कोर्ट में प्ले करने की अनुमति मांगी। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने संकेत दिया कि वे शायद उपस्थित न हों और केंद्र की ओर से अन्य वकील पक्ष रखेंगे। याचिका में हिरासत को अवैध, राजनीतिक रूप से प्रेरित और मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बताया गया है। वांगचुक को 26 सितंबर 2025 को लेह में लद्दाख के लिए संवैधानिक सुरक्षा की मांग वाले शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार किया गया था। वे जोधपुर सेंट्रल जेल में बंद हैं और 100 दिनों से अधिक हिरासत में हैं।तुलना अन्य मामलों से
उसी दिन जस्टिस विक्रम नाथ की अगुवाई वाली तीन जजों की बेंच ने आवारा कुत्तों और मवेशियों के स्वतः संज्ञान मामले में विस्तृत सुनवाई की। जस्टिस नाथ ने कहा, “आज हम प्रेमियों और नफरत करने वालों दोनों को सुनेंगे, हमारे पास पूरा समय है।” इस मामले में राज्यों की अनुपालन रिपोर्ट पर तीखे सवाल उठाए गए।
शीतकालीन अवकाश का संदर्भ
सुप्रीम कोर्ट का शीतकालीन अवकाश दिसंबर अंत से जनवरी मध्य तक रहता है, लेकिन कुछ बेंचेस जरूरी और लंबित मामलों की सुनवाई करती रहती हैं। वांगचुक मामले में दिसंबर 2025 में सुनवाई टलकर 7 जनवरी को लिस्टेड हुई थी। कोर्ट ने पहले याचिका में संशोधन की अनुमति दी और केंद्र से जवाब मांगा था।
वांगचुक के समर्थक और कार्यकर्ता लगातार रिहाई की मांग कर रहे हैं। मामले की अगली सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं। वांगचुक समर्थकों में निराशा है, जबकि कोर्ट के सूत्र कहते हैं कि मामला जल्द सुना जाएगा। अगली सुनवाई पर सभी पक्षों की दलीलें सुनी जाएंगी।

