Kuki-Naga tensions persist in Manipur: आगजनी के बाद शांति अपील, लेकिन रोड ब्लॉकेड और शटडाउन की धमकी जारी

Kuki-Naga tensions persist in Manipur: मणिपुर के कंगपोकपी जिले में कुकी-जो और नागा समुदायों के बीच तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है। 26 जनवरी को नागा उग्रवादी समूह जेलियांग्रोंग यूनाइटेड फ्रंट (ZUF-कामसन गुट) द्वारा कुकी-जो गांव में घर और झोपड़ियां जलाने की घटना के बाद दोनों पक्षों के शीर्ष संगठनों ने शांति की अपील की है, लेकिन जमीनी स्तर पर आरोप-प्रत्यारोप और विरोध प्रदर्शन जारी हैं।

घटना की शुरुआत 26 जनवरी को हुई जब ZUF के कार्यकर्ताओं ने कंगपोकपी के के. सोंगलुंग (पार्ट-2) गांव में तीन घर और चार झोपड़ियां जला दीं। समूह ने दावा किया कि ये संरचनाएं अवैध अफीम खेती के लिए इस्तेमाल हो रही थीं। कुकी-जो संगठनों ने इसे सीधा हमला करार दिया और जिम्मेदारों की गिरफ्तारी की मांग की।

इसके जवाब में 27 जनवरी को यूनाइटेड नागा काउंसिल (UNC) और कुकी इनपी मणिपुर (KIM) के प्रतिनिधियों की चुराचांदपुर में बैठक हुई। दो नागा विधायकों की पहल पर हुई इस मीटिंग में दोनों संगठनों ने संयुक्त बयान जारी कर आगजनी की कड़ी निंदा की और समुदायों से शांति बनाए रखने तथा अफवाहें न फैलाने की अपील की। बयान में कहा गया, “हम के. सोंगलुंग गांव में घर जलाने की घटना की निंदा करते हैं और सभी से किसी भी तरह की हिंसा से दूर रहने की अपील करते हैं।”

हालांकि शांति अपील के बावजूद तनाव कम नहीं हुआ। कुकी-जो संगठन कमिटी ऑन ट्राइबल यूनिटी (COTU) ने 28 जनवरी से 24 घंटे का जिला बंद का ऐलान किया है। वहीं फुटहिल्स नागा कोऑर्डिनेशन कमिटी (FNCC) ने कुकी-जो द्वारा बनाई गई नई सड़क (जर्मन/टाइगर रोड) का ब्लॉकेड जारी रखने का फैसला किया है। यह सड़क मेइतेई बहुल इलाकों को बायपास कर कंगपोकपी और चुराचांदपुर को जोड़ती है, जिसे नागा समुदाय अपनी पैतृक जमीन पर अतिक्रमण मानता है।
नागा पक्ष का आरोप है कि कुकी उग्रवादी हथियारों के साथ उनके इलाकों में घूम रहे हैं, जबकि कुकी पक्ष का कहना है कि नागा समूह अफीम खेती के नाम पर उनके गांवों को निशाना बना रहे हैं और मेइतेई समूहों से मिले हुए हैं।

मणिपुर संघर्ष में नया मोड़
मणिपुर में मई 2023 से चल रहे मेइतेई-कुकी जातीय संघर्ष में यह कुकी-नागा तनाव नया आयाम है। पहले दोनों हिल समुदाय मेइतेई के खिलाफ एकजुट नजर आते थे, लेकिन अब जमीन, सड़क और अफीम खेती जैसे मुद्दों पर दरार दिख रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर जल्द हस्तक्षेप नहीं हुआ तो यह तनाव बड़े संघर्ष में बदल सकता है।

फिलहाल सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है और स्थिति पर नजर रखी जा रही है। 28 जनवरी दोपहर तक किसी नई हिंसक घटना की खबर नहीं है, लेकिन दोनों पक्षों के कड़े रुख से शांति प्रयासों पर सवाल उठ रहे हैं।

सरकार और केंद्रीय एजेंसियों से अपील की जा रही है कि वार्ता के जरिए जमीन विवाद और ब्लॉकेड जैसे मुद्दों का स्थायी हल निकाला जाए।

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