Kidney transplant racket spreads across Uttar Pradesh: कानपुर में बड़ा रैकेट उजागर, 50+ अस्पतालों पर शक

Kidney transplant racket spreads across Uttar Pradesh: उत्तर प्रदेश पुलिस ने कानपुर में अवैध किडनी ट्रांसप्लांट के एक बड़े अंतरराज्यीय रैकेट का भंडाफोड़ किया है। यह नेटवर्क पूरे प्रदेश में फैला हुआ है और दिल्ली, लखनऊ, मेरठ, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, उन्नाव, जालौन सहित कई शहरों तक फैला है। पुलिस के अनुसार, यह रैकेट नेपाल और अन्य राज्यों तक भी जुड़ा हो सकता है।

रैकेट मुख्य रूप से टेलीग्राम ग्रुप्स के जरिए संचालित होता था। गरीब युवाओं को ब्रेनवॉश करके किडनी बेचने के लिए लुभाया जाता था। सेलिब्रिटीज़ (जैसे अमिताभ बच्चन और प्रेमानंद महाराज) के वीडियो दिखाकर उन्हें समझाया जाता था कि एक किडनी से भी सामान्य जीवन संभव है। डोनर को 7-10 लाख रुपये देने का लालच दिया जाता था, लेकिन कई मामलों में उन्हें सिर्फ 3.5-5 लाख ही मिले। वहीं मरीज से 50 लाख से 80-90 लाख रुपये तक वसूले जाते थे। एक ऑपरेशन में गिरोह को 40-50 लाख का मुनाफा होता था।

कैसे काम करता था रैकेट?

डॉक्टर और ओटी टेक्नीशियन दिल्ली-लखनऊ से फ्लाइट से कानपुर आते थे। दो कारों (किया और एर्टिगा) में मरीज और डोनर को अस्पताल पहुंचाया जाता था। ट्रांसप्लांट के तुरंत बाद टीम अलग-अलग शहरों में भाग जाती थी। भुगतान UPI से होता था और अस्पताल ओटी किराए पर देते थे (प्रति दिन 3.5-4 लाख रुपये)। कई मामलों में डॉनर और रिसीवर को फर्जी तरीके से मरीज बनाकर दिखाया जाता था।

गिरफ्तारियां और आरोपी

पुलिस ने अब तक कई लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें शामिल हैं:

डॉक्टर दंपति डॉ. सुरजीत सिंह अहुजा और डॉ. प्रीति अहुजा (अहुजा अस्पताल, कानपुर; प्रीति अहुजा कानपुर IMA की उपाध्यक्ष हैं)।ओटी टेक्नीशियन कुलदीप सिंह राघव (शांति गोपाल अस्पताल, गाजियाबाद) और राजेश कुमार (सरवोदय अस्पताल, ग्रेटर नोएडा)।दलाल शिवम अग्रवाल, अस्पताल ऑपरेटर रामप्रकाशराजेश और नरेंद्र सिंह आदि। फरार आरोपीयों में डॉ. रोहित (लखनऊ), डॉ. अफजल (मेरठ), डॉ. अनुराग और डॉ. वैभव मुद्गल शामिल हैं। एक उदाहरण में मुजफ्फरनगर की मरीज पारुल तोमर से 60 लाख रुपये लिए गए, जबकि बिहार के बेगूसराय के युवा आयुष (जो खुद को MBA स्टूडेंट बताता था) को सिर्फ 3.5-5 लाख मिले।

पुलिस की कार्रवाई

कानपुर पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल के नेतृत्व में छापेमारी की गई। अहुजा अस्पताल, प्रिया अस्पताल और मेडलाइफ अस्पताल समेत कई जगहों पर रेड। 50 से ज्यादा अस्पतालों और नर्सिंग होम्स की जांच चल रही है। अहुजा और प्रिया अस्पताल के लाइसेंस रद्द करने की प्रक्रिया शुरू। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज, कार बुकिंग, फ्लाइट टिकट और UPI ट्रांजेक्शन के जरिए पूरे नेटवर्क को ट्रेस किया।

यह रैकेट गरीब युवाओं और जरूरतमंद मरीजों दोनों का शोषण कर रहा था। पुलिस का कहना है कि जांच आगे बढ़ रही है और नए खुलासे हो सकते हैं। स्वास्थ्य विभाग भी अस्पतालों की भूमिका की जांच कर रहा है। यह मामला चिकित्सा क्षेत्र में नैतिकता और नियमन की कमी को उजागर करता है। UP पुलिस ने लोगों से अपील की है कि अवैध अंग दान या ट्रांसप्लांट से जुड़े किसी भी प्रस्ताव को तुरंत रिपोर्ट करें।

नोट: जांच अभी जारी है, इसलिए आगे और गिरफ्तारियां या खुलासे संभव हैं।

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