हाईकोर्ट का सख्त फैसला 18 वर्षीय बेंगलुरु के छात्र (श्री राम ग्लोबल स्कूल, बोम्मनहल्ली) को 17 फरवरी 2025 को क्लास 12वी की फिजिकल एजुकेशन परीक्षा के दौरान मात्र 25 मिनट बाद जेब में मोबाइल फोन मिला। इन्विजिलेटर ने फोन जब्त कर लिया, लेकिन छात्र को नया प्रश्नपत्र और उत्तर पुस्तिका देकर परीक्षा पूरी करने दी गई। बाद में CBSE की अनफेयर मीन्स कमिटी ने इसे Category-3 (इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस रखना) माना और पूरे सत्र (फिजिक्स, केमिस्ट्री, मैथ्स, इंग्लिश, फिजिकल एजुकेशन) का रिजल्ट रद्द कर दिया। छात्र ने अगले साल भी परीक्षा देने पर रोक लगा दी गई है।
छात्र ने IIT-JEE एडवांस्ड क्वालीफाई कर लिया था और दलील दी कि फोन में कोई परीक्षा सामग्री नहीं थी, न ही उसका इस्तेमाल किया गया। लेकिन कल (5 मार्च 2026) कर्नाटक हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस विभु बखरू और जस्टिस सीएम पूनाचा की डिवीजन बेंच ने CBSE की अपील मंजूर कर दी। कोर्ट ने कहा, “मोबाइल फोन एक संचार उपकरण है। परीक्षा के दौरान यदि किसी उम्मीदवार के पास मोबाइल मिलता है तो प्रश्नपत्र लीक होने और परीक्षा में सेंध लगने का खतरा बहुत ज्यादा होता है।” कोर्ट ने 2024 में CBSE द्वारा अपडेट किए गए UFM नियमों को सही ठहराया और कहा कि अदालतें एक्सपर्ट बॉडी के फैसले को कमजोर नहीं कर सकतीं। अब छात्र को अगले साल परीक्षा देनी होगी।
बजट 2026 में सोशल मीडिया पर पूर्ण प्रतिबंध इसी दिन मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने बजट पेश करते हुए घोषणा की कि 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों पर सोशल मीडिया बैन लगा दिया गया है। इसका मकसद सोशल मीडिया की लत, मानसिक स्वास्थ्य की गिरावट, पढ़ाई पर असर और ऑनलाइन खतरे से बच्चों को बचाना है। ऑस्ट्रेलिया और पश्चिमी देशों के उदाहरण देते हुए CM ने कहा कि यह कदम बच्चों के भविष्य की रक्षा के लिए जरूरी है। फरवरी में ही CM ने विश्वविद्यालयों के वाइस-चांसलर्स से इस पर राय मांगी थी और अब बजट में इसे आधिकारिक रूप से ऐलान कर दिया गया। सरकार जल्द ही इसके लिए कानूनी ढांचा और पेनल्टी तैयार करेगी। आईटी मंत्री प्रियंक खड़गे ने पहले भी डिजिटल डिटॉक्स प्रोग्राम का जिक्र किया था।
दोनों फैसलों का संदेश साफ कर्नाटक हाईकोर्ट का फैसला परीक्षा हॉल में मोबाइल की सख्ती का प्रतीक है, जबकि बजट ऐलान रोजमर्रा के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर लगाम कसने का है। शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि दोनों कदम Gen-Z की बढ़ती स्क्रीन एडिक्शन और परीक्षा में अनुचित साधनों के खिलाफ राज्य सरकार और न्यायपालिका की साझा लड़ाई दिखाते हैं। अभी छात्रों और अभिभावकों में मिश्रित प्रतिक्रियाएं हैं – कुछ इसे जरूरी बताते हैं तो कुछ कहते हैं कि शिक्षा के लिए स्मार्टफोन भी जरूरी है। सरकार का कहना है कि लागू करने से पहले स्कूलों और विशेषज्ञों से और फीडबैक लिया जाएगा। यह दिन कर्नाटक की शिक्षा व्यवस्था में एक नया अध्याय साबित हो रहा है। अधिक अपडेट्स के लिए बने रहिए!

