जेवर/गौतमबुद्धनगर: आज जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) का भव्य उद्घाटन किया, तब मंच पर तालियाँ गूँज रही थीं, लेकिन दो से तीन लाख की भीड़ जुटाने का दबाव स्थानीय भाजपा नेताओं और जिला प्रशासन पर इस कदर था कि पास के पाँच जिलों की 14 विधानसभाओं से लोगों को लाने की मशक्कत जारी थी।
जमीनी हकीकत यह थी कि रैली में बड़ी संख्या में भाड़े पर लाए गए दिहाड़ी मजदूर शामिल थे, जिन्हें मोदी-योगी के कैटलॉग और पोस्टर थमाए गए थे। कार्यक्रम के बाद जब ये लोग वापस लौटे तो कई ने पोस्टर फाड़ दिए और अपनी भड़ास निकाली। इनका कहना था कि यह एयरपोर्ट “हमारे शेड का काम करेगा” — यानी उनके रोज़गार और जीवन से इसका कोई सरोकार नहीं।
सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों का भी हाल बुरा रहा। पूरे कार्यक्रम स्थल पर PAC, RAF और स्थानीय पुलिस बड़ी संख्या में तैनात थी, लेकिन ड्यूटी पर मौजूद कई पुलिसकर्मियों ने बताया कि उन्हें पीने का पानी तक नसीब नहीं हुआ।
उधर, जेवर और आसपास के गांवों के किसान उद्घाटन की खुशी के बीच गहरी पीड़ा और आक्रोश में थे। किसान संगठनों ने 28 मार्च को उद्घाटन के दौरान विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया था और “एक प्रोजेक्ट, एक रेट” की माँग के साथ 387 दिन से चल रहे धरने को महापंचायत में बदल दिया था। स्थानीय युवा अब भी एयरपोर्ट और आसपास की फैक्टरियों में नौकरी नहीं पा रहे, जबकि खेती-पशुपालन खत्म होने से आय का कोई स्रोत नहीं बचा।
मंच से पीएम मोदी ने घोषणा की कि आने वाले समय में 100 नए एयरपोर्ट बनाए जाएंगे और यह एयरपोर्ट पश्चिम यूपी के किसानों व युवाओं के लिए अवसर लेकर आएगा। उन्होंने यह भी कहा कि अभी आधा काम हुआ है, सिर्फ पर्दा हटाया गया है। लेकिन जमीन पर खड़े उन दिहाड़ी मजदूरों, प्यासे पुलिसकर्मियों और विस्थापित किसानों के लिए यह पर्दा अभी बहुत मोटा है।

