जेवर एयरपोर्ट: उद्घाटन के पहले किसानों की पीड़ा, मुआवजा खर्च, नौकरी का वादा अधूरा, कल होगा विरोध प्रदर्शन

जेवर एयरपोर्ट: एशिया के सबसे बड़े ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) का पहला चरण कल 28 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा उद्घाटन किया जाएगा। 30-35 साल पुराना सपना अब हकीकत बन रहा है। 2017 में योगी सरकार के आने के बाद प्रोजेक्ट में तेजी आई और अब यह देश का सबसे बड़ा एयरपोर्ट बनकर तैयार है। लेकिन उद्घाटन की खुशी के बीच जेवर और आसपास के गांवों के किसान गहरी पीड़ा और आक्रोश में हैं।

करीब 18 गांवों के 25,000 किसानों ने एयरपोर्ट के लिए 5,428 हेक्टेयर जमीन दी। पहले चरण में 6 गांवों की 1,334 हेक्टेयर जमीन छह महीने में अधिग्रहण हो गई। मुआवजे के तौर पर कई किसानों को रातोंरात करोड़ों रुपये मिले—2018 में 20 लाख प्रति बीघा से शुरू होकर अब चौथे चरण में 40 लाख प्रति बीघा तक पहुंच गया। सरकार ने तीसरे और दूसरे चरण में मुआवजा बढ़ाकर 4,300 रुपये प्रति वर्ग मीटर कर दिया। फिर भी पुराने फेज के किसान अतिरिक्त मुआवजे की मांग कर रहे हैं।

मुख्य शिकायतें किसानों की:

7% प्लॉट का वादा अधूरा: 2011 से किसानों को उनकी जमीन के बदले 7% आवासीय प्लॉट देने का वादा किया गया था, लेकिन अब तक सैकड़ों परिवारों को प्लॉट नहीं मिले।

नौकरियों का झांसा: पहले दो चरणों में 334 परिवारों ने नकद मुआवजे (2,100 रुपये प्रति वर्ग मीटर) की जगह एक सदस्य को नौकरी चुन ली। लेकिन आज भी कोई नियुक्ति नहीं हुई। दयानतपुर के हंसराज सिंह ने 25 एकड़ जमीन दी, बेटे को सिविल इंजीनियरिंग डिप्लोमा है, फिर भी बेरोजगार। बनवारिपुर के सौरभ शर्मा (एमटेक) और रोही के निरज शर्मा जैसे कई युवा अब भी इंतजार कर रहे हैं। किसान सीधे एयरपोर्ट कंपनी (Yamuna International Airport Pvt Ltd) से नौकरी चाहते हैं, ठेकेदार के जरिए नहीं।

रास्तों और विस्थापन की समस्या: एयरपोर्ट बनने से पुराने रास्ते (जैसे जेवर-सिकंदराबाद रोड) बंद हो गए। अब ग्रामीणों को 20-25 किमी घूमकर जाना पड़ता है। विस्थापित गांवों में बुनियादी सुविधाएं और सड़कें अभी भी अधर में हैं।

पैसे का दुरुपयोग और आर्थिक तबाही: इंडिया टुडे की ग्राउंड रिपोर्ट के मुताबिक कई किसान मुआवजे से थार जीप, महंगे आईफोन, मार्बल वाले घर बना डाले। एक किसान ने 3 करोड़ में घर बनवाया, लेकिन अब पेट्रोल भरने के पैसे नहीं। खेती-पशुपालन खत्म, आय का कोई स्रोत नहीं बचा। कुछ युवा जुआ खेलकर समय काट रहे हैं। बेरोजगारी और आर्थिक तंगी से शिक्षा छूट रही है और अपराध बढ़ने का खतरा मंडरा रहा है।

कल उद्घाटन पर विरोध का ऐलान: भाकियू (महात्मा टिकैत) के अध्यक्ष अनिल तालन और किसान एकता संघ के अध्यक्ष सोरन प्रधान समेत किसान संगठनों ने साफ कहा—28 मार्च को जेवर एयरपोर्ट उद्घाटन के दौरान प्रदर्शन होगा। वे ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट में भी “एक प्रोजेक्ट, एक रेट” की मांग कर रहे हैं। 387 दिन से चल रहे धरने को महापंचायत में बदला गया। किसान कहते हैं, “पूरे प्रोजेक्ट में मुआवजा समान होना चाहिए।”

सरकार का पक्ष: मुख्यमंत्री योगी ने हाल ही में मुआवजा बढ़ाया और किसानों से बातचीत की। जेवर विधायक धीरेंद्र सिंह का कहना है कि जमीन राष्ट्रीय प्रोजेक्ट के लिए दी गई, अब नौकरियां देना सरकार का दायित्व है। एयरपोर्ट के बाद स्थानीय रोजगार, कार्गो टर्मिनल और एमआरओ सुविधा से हजारों नौकरियां आने की उम्मीद है।

भविष्य की चिंता: किसानों का कहना है कि अचानक मिले पैसे ने युवाओं का पढ़ाई से ध्यान हटा दिया। फिल्म सिटी प्रोजेक्ट को भी कई लोग सिर्फ कागजी मान रहे हैं। स्थानीय युवा अब भी एयरपोर्ट और आसपास की फैक्टरियों में नौकरी नहीं पा रहे। जेवर एयरपोर्ट देश की उड़ान को नई ऊंचाई देगा, लेकिन किसानों की जमीन पर खड़ा यह सपना तभी पूरा माना जाएगा जब वादे पूरे होंगे। कल का उद्घाटन विकास की नई कहानी लिखेगा या पुरानी पीड़ा को और उजागर करेगा—यह देखने वाली बात होगी।

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