जेमिमाह रोड्रिग्स बालकनी से मैदान तक का सफर

ICC Women’s World Cup / Jemimah Rodrigues: क्रिकेट के दीवाने जानते हैं कि भारत की 2011 वर्ल्ड कप जीत का जश्न आज भी दिलों में बस्ता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि उस ऐतिहासिक पल का एक अनोखा कनेक्शन आज की सितारा बल्लेबाज जेमिमाह रोड्रिग्स से जुड़ा हुआ है? जेमिमाह, जो हाल ही में आईसीसी विमेंस वर्ल्ड कप 2025 में भारत को पहली बार चैंपियन बनाने वाली टीम की महत्वपूर्ण सदस्य रहीं, ने खुद बताया कि कैसे उन्होंने अपने घर की बालकनी से सचिन तेंदुलकर को वर्ल्ड कप ट्रॉफी के साथ देखा था। यह कहानी न सिर्फ क्रिकेट की प्रेरणा बनी, बल्कि जेमिमाह के सपनों की नींव भी रखी।

साल 2011 था। मुंबई के बांद्रा इलाके में हलचल मच गई थी। सचिन तेंदुलकर, जिन्हें क्रिकेट का भगवान कहा जाता है, भारत को पहली वनडे वर्ल्ड कप जीत दिलाने के बाद घर लौटे। उनके घर के बाहर फैंस की भारी भीड़ जमा हो गई। उसी बांद्रा की एक संकरी बालकनी पर खड़ी 11 साल की एक छोटी लड़की यह नजारा देख रही थी—वह थीं जेमिमाह रोड्रिग्स। जेमिमाह का घर सचिन के निवास के ठीक बगल में था। उन्होंने बताया, “जब सचिन सर ट्रॉफी लेकर आए, तो पूरा इलाका जश्न में डूब गया।

मैंने उस पल को देखा और सोचा कि एक दिन मैं भी ऐसा ही कुछ हासिल करूंगी।” यह दृश्य जेमिमाह के लिए सिर्फ एक याद नहीं, बल्कि क्रिकेट में कदम रखने की प्रेरणा बन गया।

जेमिमाह का सफर आसान नहीं था। बचपन में वह हॉकी और क्रिकेट दोनों खेलती रहीं। राज्य स्तर पर हॉकी में अच्छा प्रदर्शन करने के बावजूद, उन्होंने क्रिकेट चुना। लेकिन चुनौतियां रुकीं नहीं। 2022 में वर्ल्ड कप स्क्वॉड से बाहर होना उनके लिए बड़ा झटका था। फिर भी, उन्होंने हार नहीं मानी। 2025 वर्ल्ड कप में जेमिमाह ने शानदार वापसी की। सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ नाबाद 127 रनों की पारी खेलकर भारत को फाइनल में पहुंचाया। फाइनल में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ भारत ने 52 रनों से जीत हासिल की, और जेमिमाह की यह पारी टीम की जीत का अहम हिस्सा बनी।

सचिन तेंदुलकर ने भी जेमिमाह की इस यात्रा की तारीफ की। सेमीफाइनल के बाद ट्वीट करते हुए उन्होंने लिखा, “फैबुलस विक्ट्री! वेल डन @JemiRodrigues और @ImHarmanpreet फॉर लीडिंग फ्रॉम द फ्रंट।” फाइनल जीत के बाद सचिन ने कहा, “यह भारत की विमेंस क्रिकेट के सफर में एक डिफाइनिंग मोमेंट है। 1983 की तरह, 2025 लड़कियों को सपने देखने की प्रेरणा देगी।” जेमिमाह ने भी स्वीकार किया कि सचिन की 2011 की जीत ने उन्हें आत्मविश्वास दिया। हाल ही में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात में जेमिमाह ने कहा, “सचिन सर की जीत के समय हमारा घर उनके बगल में था। यह हमारी टीम का सामूहिक सपना था, जो अब पूरा हो गया।”

यह कनेक्शन सिर्फ व्यक्तिगत नहीं, बल्कि पूरे भारतीय क्रिकेट का प्रतीक है। 2011 की जीत ने लाखों बच्चों को प्रेरित किया, और जेमिमाह जैसी प्रतिभाओं ने उसे आगे बढ़ाया। आज, जब जेमिमाह गोल्ड मेडल के साथ सेल्फी ले रही हैं, तो वह बालकनी वाली लड़की मुस्कुरा रही होगी। क्रिकेट के इस सुनहरे अध्याय ने साबित कर दिया कि सपने लिंग या उम्र नहीं देखते। जय हो भारत!

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