नई दिल्ली/न्यूयॉर्क: दुनिया के सबसे कुख्यात यौन अपराधी रहे अमेरिकी फाइनेंसर जेफ्री एपस्टीन (Jeffrey Epstein) से जुड़े सनसनीखेज खुलासों ने एक बार फिर भारतीय गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। हाल ही में जारी हुए करीब 30 लाख पन्नों के ‘एपस्टीन फाइल्स’ (Epstein Files) में कुछ प्रमुख भारतीय हस्तियों और राजनेताओं के संदर्भ मिलने के बाद विपक्ष और सरकार के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है।
आखिर क्या है जेफ्री एपस्टीन मामला?
जेफ्री एपस्टीन अमेरिका का एक रईस और प्रभावशाली फाइनेंसर था, जिस पर नाबालिग लड़कियों की सेक्स ट्रैफिकिंग (Sex Trafficking) और यौन शोषण का एक अंतरराष्ट्रीय रैकेट चलाने का आरोप था।
- अपराध: वह दुनिया के ताकतवर लोगों को अपने निजी द्वीप और घरों पर बुलाता था, जहां कम उम्र की लड़कियों का शारीरिक शोषण किया जाता था।
- गिरफ्तारी और मौत: 2019 में गिरफ्तारी के बाद न्यूयॉर्क की जेल में उसकी रहस्यमयी परिस्थितियों में मौत हो गई (जिसे आधिकारिक तौर पर आत्महत्या बताया गया, हालांकि इसकी जांच अब भी विवादित है)।
- फाइल्स का खुलासा: अमेरिकी कोर्ट के आदेश के बाद एपस्टीन के संपर्कों, ईमेल और डायरी की कड़ियों को सार्वजनिक किया जा रहा है। इसमें उन लोगों के नाम हैं जिन्होंने एपस्टीन से मुलाकात की थी या उसके साथ पत्राचार किया था।
किन भारतीय नामों की हो रही है चर्चा?
ताजा दस्तावेजों में मुख्य रूप से तीन बड़े भारतीय संदर्भ सामने आए हैं:
1. हरदीप सिंह पुरी (केंद्रीय मंत्री): दस्तावेजों में भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी का नाम सामने आया है। ईमेल के अनुसार, 2014 में उन्होंने एपस्टीन के साथ पत्राचार किया था। उस समय वह सेवानिवृत्त राजनयिक थे और मंत्री पद पर नहीं थे। फाइल्स में संकेत मिलता है कि उन्होंने एपस्टीन से निवेश और वैश्विक संपर्कों को लेकर चर्चा की थी। विपक्ष का आरोप है कि वह एपस्टीन के न्यूयॉर्क स्थित घर भी गए थे।
2. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जिक्र: एपस्टीन के एक ईमेल में पीएम मोदी की 2017 की इजरायल यात्रा का संदर्भ दिया गया है। एपस्टीन ने दावा किया था कि उसने इस यात्रा को सफल बनाने में “परामर्श” दिया था। हालांकि, भारत सरकार ने इसे “पूरी तरह से बकवास” (Trashy ruminations) करार दिया है।
3. अनिल अंबानी (उद्योगपति): दस्तावेजों में उद्योगपति अनिल अंबानी का नाम भी सामने आया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, एपस्टीन और अंबानी के बीच कुछ ईमेल एक्सचेंज हुए थे, जिसमें अमेरिकी प्रशासन तक पहुंच बनाने और निवेश के अवसरों पर चर्चा की गई थी।
भारत सरकार और विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया
भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। सरकार का रुख स्पष्ट है:
“एक अपराधी के ईमेल में किसी का नाम आने का मतलब यह नहीं है कि वह व्यक्ति किसी गलत काम में शामिल था। पीएम मोदी की इजरायल यात्रा एक आधिकारिक कूटनीतिक दौरा था, जिसे किसी अपराधी के दावों से जोड़ना हास्यास्पद है।”
केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भी आरोपों को निराधार बताया है। उन्होंने कहा कि विपक्ष (विशेषकर राहुल गांधी) तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश कर रहा है और इसे “स्मियर कैंपेन” (छवि बिगाड़ने का अभियान) करार दिया।
निष्कर्ष: क्या वाकई कोई खतरा है?
यह समझना जरूरी है कि एपस्टीन फाइल्स में नाम होने का मतलब यह नहीं है कि वह व्यक्ति सेक्स रैकेट में शामिल था। एपस्टीन के पास दुनिया के कई बड़े वैज्ञानिकों, राजनेताओं और व्यापारियों की पहुंच थी। भारतीय संदर्भों में अब तक जो भी जानकारी सामने आई है, वह व्यावसायिक मीटिंग्स और लॉबिंग तक सीमित दिखती है। हालांकि, राजनीतिक रूप से यह मुद्दा 2026 की भारतीय राजनीति में एक बड़ा हथियार बन गया है।
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