Jammu and Kashmir win the Ranji Trophy: 67 साल का इंतजार खत्म, कर्नाटक को हराकर लिखी इतिहास की नई इबारत

Jammu and Kashmir win the Ranji Trophy: दशकों की मेहनत, संरचनात्मक सुधारों और अनुशासन की जीत! जम्मू-कश्मीर ने आज से ठीक चार दिन पहले (28 फरवरी 2026) कर्नाटक के हुबली में खेले गए रणजी ट्रॉफी फाइनल में 8 बार के चैंपियन कर्नाटक को हराकर अपना पहला रणजी खिताब जीत लिया। मैच ड्रॉ रहा, लेकिन पहली पारी में 291 रनों की विशाल बढ़त के आधार पर जम्मू-कश्मीर को चैंपियन घोषित किया गया। यह जीत कोई चमत्कार नहीं, बल्कि सालों की रणनीतिक प्लानिंग, कल्चरल रीसेट और कड़ी मेहनत का नतीजा है।
जम्मू-कश्मीर की पहली पारी 584 रनों पर समाप्त हुई (शुभम पुंडीर 121, यावर हसन 88), जबकि कर्नाटक 293 रनों पर ऑलआउट (मयंक अग्रवाल 160; औकिब नबी 5/54)। दूसरी पारी में कर्नाटक को 633 रनों की बढ़त का सामना करना पड़ा। जम्मू-कश्मीर ने 342/4 (कमरान इकबाल 160*, साहिल लोत्रा 101*) पर डिक्लेयर कर दिया। औकिब नबी पूरे टूर्नामेंट में 60 विकेट लेकर प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट बने।

संरचनात्मक सुधारों की कहानी:
बीसीसीआई अध्यक्ष मिथुन मन्हास (जम्मू-कश्मीर से) की दूरदृष्टि से शुरू हुआ बदलाव। उन्होंने ब्रिगेडियर अनिल गुप्ता और जय शाह के साथ सब-कमिटी बनाई। बाहर से कोच अजय शर्मा, गैर-स्थानीय कप्तान परास डोगरा और निरंतर सपोर्ट स्टाफ की नियुक्ति की। जम्मू में रेड मिट्टी (रेड-क्ले) विकेट बनाए गए ताकि बाहर की पिचों पर टीम संघर्ष न करे। अजय शर्मा ने कहा, “आईपीएल अलग फॉर्मेट है। जब तक रणजी में प्रदर्शन नहीं करोगे, स्टार नहीं बनोगे।” अब्दुल समद को लापरवाही के लिए ड्रॉप किया गया, फिर उन्होंने 10 मैचों में 748 रन बनाए (औसत 57)।

कल्चरल रीसेट और अनुशासन:
स्टार कल्चर खत्म कर प्रोसेस पर फोकस। समद ने 2019 क्वार्टरफाइनल में कर्नाटक के खिलाफ 14 रन से सेंचुरी चूकने का दर्द याद करते हुए कहा, “अब मैं 24 का हूं, परिपक्व हो चुका हूं। यह जीत उस दर्द को कम करेगी।” कोच ने नेट्स में भी मैच जैसा माहौल बनाया। गेंदबाजी कोच पी. कृष्ण कुमार ने औकिब नबी की कंसिस्टेंसी की तारीफ की।
पथराव की राह:
1959-60 से खेल रहे जम्मू-कश्मीर ने मुंबई, राजस्थान, दिल्ली, बंगाल और कर्नाटक जैसे दिग्गजों को हराया। सेमीफाइनल में बंगाल को 6 विकेट से, क्वार्टर में बंगाल को शिकस्त दी। यह 67 साल का इंतजार खत्म करने वाला पल था।

जम्मू-कश्मीर सीएम उमर अब्दुल्लाह ने खिलाड़ियों और स्टाफ को 2 करोड़ रुपये का इनाम और सरकारी नौकरियां देने का ऐलान किया। वे फाइनल देखने हुबली पहुंचे थे।खिलाड़ियों ने बीसीसीआई अध्यक्ष मिथुन मन्हास को कंधों पर उठाया।पूरे जम्मू-कश्मीर में जश्न का माहौल, युवाओं में क्रिकेट का क्रेज बढ़ा। कप्तान परास डोगरा ने कहा, “यह मेरे जीवन का सबसे बड़ा पल है।” यह जीत साबित करती है कि सही इंजीनियरिंग के साथ महत्वाकांक्षा हमेशा जीत सकती है। जम्मू-कश्मीर क्रिकेट के लिए स्वर्णिम अध्याय!

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