इज़राइल चुनाव 2026: नेतन्याहू की राजनीतिक किस्मत दांव पर, ईसेनकोट ने पेश किया सख्त सुरक्षा विकल्प; मतदान शुरू

जेवसलम/तेल अवीव। इज़राइल में मंगलवार को ऐतिहासिक संसदीय चुनाव हो रहा है। यह 7 अक्टूबर 2023 के हमास हमले के बाद देश का पहला आम चुनाव है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अपनी दशकों लंबी राजनीतिक करियर की सबसे बड़ी परीक्षा दे रहे हैं। उनके सामने सबसे मजबूत चुनौती पूर्व आईडीएफ चीफ ऑफ स्टाफ गादी ईसेनकोट हैं, जिन्होंने सुरक्षा के मामले में सख्त रुख रखते हुए नेतन्याहू का विकल्प पेश किया है। मतदान सुबह 7 बजे (स्थानीय समय) शुरू हो गया। लगभग 73 लाख मतदाता पात्र हैं। करीब 70 हजार लोग विदेश से वोट डालने आए हैं और आधा मिलियन पहली बार वोट करेंगे। पोलिंग स्टेशन रात 10 बजे बंद होंगे।

 

चुनाव का केंद्र: सुरक्षा बनाम जवाबदेही

तीन साल के युद्ध, गाजा अभियान और ईरान के साथ टकराव के बाद यह चुनाव नेतन्याहू के नेतृत्व पर जनमत संग्रह बन गया है। 7 अक्टूबर 2023 के हमले में करीब 1200 इज़राइली मारे गए और सैकड़ों बंधक बनाए गए थे। नेतन्याहू ने युद्धकालीन नेतृत्व और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ गठबंधन पर अभियान चलाया। ट्रंप ने नेतन्याहू का समर्थन किया और कहा कि दोनों मिलकर ईरान के खतरे को खत्म कर सकते हैं।

ईसेनकोट, जो 2015-2019 में आईडीएफ के चीफ ऑफ स्टाफ रहे, सुरक्षा के मामले में हॉक (सख्त) माने जाते हैं। उनके बेटे की गाजा में लड़ाई के दौरान 2023 में मौत हो गई थी। उन्होंने नेतन्याहू पर डर फैलाने, झूठ और धमकियों का आरोप लगाया है। ईसेनकोट का यशर पार्टी सेंटर-राइट रुख अपनाए हुए है। उनके गठबंधन में नाफ्ताली बेनेट, अविग्दोर लिबरमैन और कुछ सेंट्रिस्ट-लेफ्ट पार्टियां शामिल हैं।

अंतिम पोल: दोनों ब्लॉक 61 सीटों से दूर

शुक्रवार को प्रकाशित अंतिम सर्वेक्षणों में ईसेनकोट की यशर पार्टी को 22-23 सीटें और नेतन्याहू की लिकुड को 19-21 सीटें मिलीं। विपक्षी ब्लॉक को 52-56 सीटें और नेतन्याहू के गठबंधन (लिकुड + सुदूर दक्षिणपंथी + अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स) को करीब 48-50 सीटें बताई गईं। 120 सदस्यीय नेसेट में बहुमत के लिए 61 सीटें जरूरी हैं। अरब पार्टियों को मिलाकर 14-16 सीटें मिलने का अनुमान है। दोनों मुख्य ब्लॉक अरब पार्टियों पर निर्भर रहने से बच रहे हैं। अगर कोई भी गठबंधन नहीं बना पाता तो नेतन्याहू केयरटेकर प्रधानमंत्री बने रह सकते हैं और अगले साल दोबारा चुनाव हो सकते हैं।

नेतन्याहू बनाम ईसेनकोट: दो अलग दृष्टिकोण

नेतन्याहू इज़राइल के सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहे हैं (कुल 19 साल)। वे युद्धकालीन मजबूती, ईरान नीति और राष्ट्रवादी एजेंडे पर वोट मांग रहे हैं। उनके गठबंधन में बेजालेल स्मोट्रिच और इतामार बेन-गवीर जैसी सुदूर दक्षिणपंथी पार्टियां शामिल हैं।

ईसेनकोट ने जवाबदेही, लोकतंत्र की रक्षा और हरेदी (अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स) समुदाय की सैन्य सेवा लागू करने पर जोर दिया है। वे नेतन्याहू के साथ रोटेशन समझौते से इनकार कर चुके हैं। उनके समर्थक बदलाव चाहते हैं और 7 अक्टूबर की विफलता के लिए जवाबदेही मांगते हैं।

चुनाव नतीजे के बाद गठबंधन बनाने की प्रक्रिया शुरू होगी। राष्ट्रपति उस नेता को मौका देंगे जो 61 सीटों का गठबंधन बना सके। इसमें हफ्ते या महीने लग सकते हैं। यह चुनाव सिर्फ सत्ता का फैसला नहीं, बल्कि इज़राइल के भविष्य की दिशा तय करेगा सुरक्षा, गाजा नीति, ईरान और आंतरिक लोकतंत्र के मुद्दे पर। मतदाता तय करेंगे कि नेतन्याहू का लंबे समय का शासन जारी रहेगा या ईसेनकोट के नेतृत्व में नया अध्याय शुरू होगा।

यह भी पढ़ें: गुवाहाटी। किराएदार ने लीज विवाद में मालकिन समेत परिवार के 4 सदस्यों सहित 5 की हत्या, आरोपी गिरफ्तार

यहां से शेयर करें