समझौते की मुख्य विशेषताएं
यह फ्रेमवर्क समझौता अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के बीच महत्वपूर्ण खनिजों के उत्पादन, प्रोसेसिंग और व्यापार को मजबूत करने पर केंद्रित है। इसमें शामिल हैं:
• अमेरिका द्वारा ऑस्ट्रेलिया में प्रोसेसिंग सुविधाओं में निवेश, जैसे वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया में 100 टन प्रति वर्ष की क्षमता वाली गैलियम रिफाइनरी का निर्माण।
• दोनों देशों द्वारा महत्वपूर्ण खनिजों के लिए न्यूनतम मूल्य फ्लोर की स्थापना, जो पश्चिमी खनिकों की लंबे समय से मांग रही है।
• अमेरिकी एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट बैंक से लगभग 2.2 अरब डॉलर का फाइनेंसिंग, जो इन प्रोजेक्ट्स को आगे बढ़ाएगा।
• अमेरिका ने हाल ही में अपनी दुर्लभ पृथ्वी कंपनी एमपी मटेरियल्स में 400 मिलियन डॉलर का निवेश किया है, जिसमें 10 साल का मूल्य फ्लोर (110 डॉलर प्रति किलोग्राम) शामिल है।
यह समझौता ऑस्ट्रेलियाई कंपनियों जैसे लिनास रेयर अर्थ्स को लाभ पहुंचाएगा, जिनकी शेयर कीमतें समझौते की घोषणा से पहले 25% तक बढ़ गई थीं, हालांकि बाद में थोड़ी गिरावट आई। यह डील AUKUS (अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन के बीच सैन्य गठबंधन) के साथ भी जुड़ी हुई है, जहां ट्रंप ने परमाणु-संचालित पनडुब्बियों की डिलीवरी को ‘पूर्ण गति से आगे’ बताया है।
चीन की एकाधिकार और खतरा
दुनिया भर में दुर्लभ पृथ्वी खनिजों का 70% खनन और 90% प्रोसेसिंग चीन के नियंत्रण में है, जो इलेक्ट्रिक वाहनों, कंप्यूटर चिप्स, रक्षा उपकरणों और नवीकरणीय ऊर्जा के लिए आवश्यक हैं। हाल ही में, अमेरिकी टैरिफ के जवाब में चीन ने दुर्लभ पृथ्वी निर्यात पर कड़े प्रतिबंध लगाए हैं, जिसमें थुलियम, यूरोपियम और येटरबियम जैसे तत्व शामिल हैं। 1 दिसंबर 2025 से लागू होने वाले इन प्रतिबंधों में विदेशी प्रत्यक्ष उत्पाद नियम (FDPR) शामिल है, जो चीनी मूल के सामग्री वाले उत्पादों पर लाइसेंस की आवश्यकता डालता है। अमेरिकी अधिकारियों ने इन्हें वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला के लिए खतरा बताया है।
यह समझौता चीन की इस एकाधिकार को तोड़ने का प्रयास है, क्योंकि ऑस्ट्रेलिया में बड़े भंडार हैं लेकिन प्रोसेसिंग के लिए अभी भी चीन पर निर्भर है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह डील अमेरिका को वैकल्पिक आपूर्ति स्रोत प्रदान करेगी, लेकिन पूर्ण स्वतंत्रता हासिल करने में समय लगेगा। सोशल मीडिया पर चर्चा में इसे चीन के खिलाफ रणनीतिक कदम बताया जा रहा है, जो इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सैन्य प्रक्षेपण को मजबूत करेगा।
प्रतिक्रियाएं और व्यापक प्रभाव
ट्रंप ने कहा कि यह समझौता पिछले चार-पांच महीनों की वार्ता का नतीजा है और चीन को तीन अंकों वाले टैरिफ की धमकी दी है। अल्बानीज ने इसे ‘नेक्स्ट लेवल’ सहयोग बताया। चीन की ओर से अभी कोई सीधी प्रतिक्रिया नहीं आई, लेकिन उसके निर्यात नियंत्रणों को अमेरिका-चीन तनाव का हिस्सा माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह समझौता रक्षा और तकनीकी क्षेत्रों में अमेरिका की निर्भरता कम करेगा, लेकिन पर्यावरणीय गलतियों से बचने की चेतावनी भी दी गई है, जैसे चीन में हुए प्रदूषण। कुल मिलाकर, यह डील वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को पुनर्गठित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो चीन के लिए ‘गले की फांस’ साबित हो सकती है।

