हालांकि, जनवरी के पहले 15 दिनों (1 से 15 जनवरी) में 807 लोगों के लापता होने की रिपोर्ट ने काफी चर्चा पैदा की। इनमें से 509 महिलाएं और लड़कियां थीं, जबकि 298 पुरुष।
नाबालिगों की संख्या 191 थी, जिनमें 146 लड़कियां और 45 लड़के शामिल थे। दैनिक औसत करीब 54 मामले रहे। पुलिस ने अब तक इनमें से कई को ट्रेस कर लिया है, लेकिन कुछ रिपोर्ट्स में अनट्रेस्ड मामलों की संख्या 572 बताई गई।
दिल्ली पुलिस के जॉइंट कमिश्नर और पीआरओ संजय त्यागी ने कहा, “जनवरी 2026 में लापता लोगों की रिपोर्ट्स में पिछले साल की तुलना में कमी आई है। 2025 में पूरे साल करीब 25,000 मामले दर्ज हुए थे, और इस साल भी ट्रेंड नीचे की ओर है। कोई पैनिक करने की जरूरत नहीं है। अभी तक किसी संगठित गिरोह के सक्रिय होने के सबूत नहीं मिले हैं।” पुलिस ने जनता से अपील की है कि सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों पर ध्यान न दें, क्योंकि ज्यादातर मामले रनअवे (घर से भागने) या पारिवारिक विवादों से जुड़े होते हैं और जल्द ट्रेस हो जाते हैं।
इस मुद्दे पर राजनीतिक बवाल भी हो रहा है। आम आदमी पार्टी के संयोजक और पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने 4 फरवरी को एक्स (ट्विटर) पर पोस्ट कर चिंता जताई। उन्होंने लिखा, “दिल्ली में सिर्फ 15 दिन में 807 लोग गायब हो गए, जिनमें सबसे ज्यादा महिलाएं और बच्चे हैं। ये हालात सामान्य नहीं, बेहद डराने वाले हैं। दिल्ली पुलिस केंद्र सरकार (गृह मंत्रालय) के अधीन है, फिर भी राजधानी इतनी असुरक्षित क्यों है?” कांग्रेस ने भी केंद्र की भाजपा सरकार पर कानून-व्यवस्था फेल होने का आरोप लगाया।
विशेषज्ञों का कहना है कि दिल्ली जैसे महानगर में लापता लोगों की रिपोर्ट्स की संख्या हमेशा ऊंची रहती है, लेकिन ट्रेसिंग रेट भी 90% से ज्यादा होता है। पुलिस का जोर है कि आंकड़ों को संदर्भ के बिना देखने से गलत धारणा बनती है।
नागरिकों से अपील है कि लापता होने की स्थिति में तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन या हेल्पलाइन (1091 या 112) पर संपर्क करें। अफवाहों से बचें और सतर्क रहें।

