अबू धाबी/पेरिस: मध्य पूर्व में संघर्ष ने उस समय नया मोड़ ले लिया जब ईरान ने अबू धाबी में ‘अल सलाम’ नौसैनिक ठिकाने (Al Salam Naval Base) को निशाना बनाया। इस ठिकाने को ‘कैंप डी ला पैक्स’ (Camp de la Paix) के नाम से भी जाना जाता है और यहाँ फ्रांस की नौसेना का स्थायी आधार है।
हमले का विवरण और नुकसान
फ्रांस की रक्षा मंत्री कैथरीन वौटरीन और राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन ने इस हमले की पुष्टि की है। हमले से जुड़ी मुख्य बातें निम्नलिखित हैं:
हमले का स्वरूप: संयुक्त अरब अमीरात के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, हमला दो ईरानी ड्रोनों द्वारा किया गया था।
नुकसान: एक ड्रोन पोर्ट के पास स्थित फ्रांसीसी सैन्य ठिकाने के एक ‘हैंगर’ (Hangar) से टकराया। हालांकि, अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि इससे केवल सीमित भौतिक नुकसान हुआ है और कोई हताहत नहीं हुआ है।
अलर्ट लेवल: रक्षा मंत्री ने सोशल मीडिया (X) पर जानकारी दी कि क्षेत्र में तैनात फ्रांसीसी सेना को ‘मैक्सिमम अलर्ट’ पर रखा गया है।
तनाव की वजह: फ्रांस का रुख
यह हमला उस समय हुआ है जब फ्रांस ने इस क्षेत्र में अमेरिका और इजरायल के साथ खड़े होने के संकेत दिए हैं। हाल ही में राष्ट्रपति मैक्रॉन ने स्पष्ट किया था कि फ्रांस अपने नागरिकों और सहयोगियों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।
ईरान का यह कदम दरअसल अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हालिया हमलों की प्रतिक्रिया के रूप में देखा जा रहा है। ईरान ने चेतावनी दी है कि वह उन देशों को भी निशाना बनाएगा जो उसके दुश्मनों को अपनी जमीन इस्तेमाल करने की अनुमति देते हैं।
फ्रांस की जवाबी तैयारी
हमले के तुरंत बाद फ्रांस ने अपनी सुरक्षा रणनीति में बड़े बदलाव किए हैं:
राफेल विमानों की तैनाती: फ्रांस ने अबू धाबी के पास स्थित अल-दफरा एयरबेस से अपने राफेल लड़ाकू विमानों को गश्त पर तैनात कर दिया है ताकि भविष्य के ड्रोन हमलों को हवा में ही रोका जा सके।
विमानवाहक पोत: राष्ट्रपति मैक्रॉन ने भूमध्य सागर में अपने विमानवाहक पोत (Aircraft Carrier) को भेजने की घोषणा की है।
परमाणु रणनीति: तनाव को देखते हुए फ्रांस ने अपनी परमाणु प्रतिरोध क्षमता (Nuclear Deterrence) को और मजबूत करने और सहयोगियों के साथ समन्वय बढ़ाने का फैसला किया है।
वर्तमान में स्थिति काफी संवेदनशील बनी हुई है। खाड़ी देशों में तैनात सभी अंतरराष्ट्रीय सेनाएं अब हाई अलर्ट पर हैं क्योंकि ईरान ने न केवल सैन्य ठिकानों बल्कि आर्थिक केंद्रों (जैसे तेल टर्मिनल) को भी निशाना बनाना शुरू कर दिया है।

