ईरान की जवाबी कार्रवाई तेज हो गई है मिसाइल और ड्रोन हमले इजरायल, अमेरिकी अड्डों और खाड़ी देशों पर हो रहे हैं। इसी बीच युद्ध लेबनान तक फैल गया है। 11 मार्च 2026 को इजरायली डिफेंस फोर्स (IDF) ने बेरूत में हिजबुल्लाह के 70 ठिकानों (इंफ्रास्ट्रक्चर, हथियार डिपो, सेंट्रल हेडक्वार्टर और IRGC एयर फोर्स हेडक्वार्टर) पर तीव्र हमले किए। IDF ने कहा, “हम बेरूत के दिल में आतंकवादी ठिकानों पर हमला जारी रखे हुए हैं।”
इराक में स्थिति और बिगड़ी है। 11 मार्च की रात बगदाद के डिप्लोमैटिक सपोर्ट सेंटर पर ईरान समर्थित मिलिशिया का ड्रोन हमला हुआ तीन सिक्योरिटी गार्ड घायल हो गए। उसी दिन इराक के बासरा के उम्म कासर बंदरगाह पर दो तेल टैंकरों पर हमला हुआ, एक क्रू सदस्य की मौत हो गई और 38 को बचाया गया। अमेरिकी दूतावास और एरबिल कांसुलेट भी हमलों की चपेट में हैं।
अमेरिकी निकासी में दिक्कतें:
युद्ध शुरू होने के 10 दिन बाद भी अमेरिकी स्टाफ को निकालने में मुश्किलें आ रही हैं। स्टेट डिपार्टमेंट ने नॉन-इमरजेंसी कर्मचारियों को निकलने का आदेश दिया, लेकिन सुरक्षा खतरों के कारण फ्लाइट्स रुकीं हुई है। आखिरकार ब्रिटिश रॉयल एयर फोर्स (RAF) ने एरबिल और अन्य जगहों से अमेरिकी डिप्लोमैटिक स्टाफ और कॉन्ट्रैक्टर्स को साइप्रस पहुंचाया। स्टेट डिपार्टमेंट के प्रवक्ता ने कहा, “हम इराक सरकार से संपर्क में हैं ताकि हमारे स्टाफ और सुविधाओं की सुरक्षा हो।” लेकिन ट्रंप प्रशासन इराक की मदद से निराश है।
ट्रंप के बयान:
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, “अमेरिका ने ईरान युद्ध जीत लिया है लेकिन काम अभी पूरा करना है।” तेल कीमतें नियंत्रित करने के लिए उन्होंने स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व से 17.2 करोड़ बैरल तेल रिलीज करने का आदेश दिया (120 दिन में पूरा होगा)। ट्रंप बोले, “हम इसे रिलीज करेंगे और बाद में फिर भर देंगे।” यह युद्ध अब पूरे मध्य पूर्व को अपनी चपेट में ले चुका है। इराक तटस्थ रहने की कोशिश कर रहा है, लेकिन ईरान समर्थित हमले जारी हैं। अमेरिका और इजरायल की ओर से “फिनिश द जॉब” की रणनीति पर जोर है, जबकि ईरान की जवाबी कार्रवाई से तेल की कीमतें और क्षेत्रीय अस्थिरता बढती ही जा रही है। स्थिति पर नजर बनी हुई है कोई तत्काल सीजफायर की खबर नहीं।

