America-Iran : नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने एक बार फिर मध्य पूर्व की स्थिति को बेहद संवेदनशील बना दिया है। पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में हुई शांति वार्ता विफल होने के बाद हालात और बिगड़ते नजर आ रहे हैं।
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रणनीतिक रूप से अहम होर्मुज जलडमरूमध्य में नौसैनिक नाकेबंदी का संकेत दिया है, जिससे वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ गई है।
ईरान का कड़ा जवाब
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने ट्रंप के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। IRGC ने दावा किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर उसका पूर्ण नियंत्रण है और किसी भी “गलत कदम” का जवाब बेहद कड़े तरीके से दिया जाएगा।
ईरानी सेना ने चेतावनी देते हुए कहा कि दुश्मन को इस रणनीतिक जलमार्ग में “जानलेवा भंवरजाल” का सामना करना पड़ सकता है।
अमेरिका की बढ़ी सैन्य गतिविधियां
ट्रंप ने कहा है कि अमेरिकी नौसेना के पास इस अहम समुद्री मार्ग पर नियंत्रण स्थापित करने की क्षमता है। क्षेत्र में USS Gerald R. Ford और USS Abraham Lincoln जैसे विमानवाहक पोत पहले से तैनात हैं, जिससे अमेरिका की समुद्री ताकत और निगरानी क्षमता बढ़ गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिका नाकेबंदी करता है, तो होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही पर सीधा असर पड़ेगा, जिसका असर वैश्विक तेल आपूर्ति पर भी दिख सकता है।
इजरायल ने बढ़ाई तैयारी
तनाव बढ़ने के बीच इजरायल ने अपनी सेना को अलर्ट पर रख दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सेना को किसी भी संभावित संघर्ष के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं।
रूस की मध्यस्थता की पेशकश
इस बीच, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ईरान के राष्ट्रपति से बातचीत कर स्थिति को शांत करने की पहल की है। पुतिन ने कहा कि रूस मध्य पूर्व में स्थायी समाधान के लिए मध्यस्थता करने को तैयार है।
वैश्विक असर की आशंका
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव और बढ़ता है, तो इसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार और विश्व अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। फिलहाल क्षेत्र में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं और दुनिया की नजर इस पर टिकी हुई है।
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