Iran Protests: ईरान में चल रहे राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शनों में महिलाओं द्वारा सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की तस्वीर जलाकर उसकी लौ से सिगरेट सुलगाने की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। यह कार्य महिलाओं की आजादी और विद्रोह का नया प्रतीक बन गया है।
ये तस्वीरें “महिला, जीवन, स्वतंत्रता” आंदोलन की निरंतरता मानी जा रही हैं, जो 2022 में महसा अमीनी की मौत के बाद शुरू हुआ था। ईरान में महिलाओं का सार्वजनिक रूप से सिगरेट पीना लंबे समय से वर्जित रहा है और इसे अनैतिक माना जाता है। खामेनेई की तस्वीर जलाना तो अपराध है ही। दोनों को मिलाकर यह कार्य दोहरा विद्रोह है – धार्मिक शासन और पितृसत्तात्मक नियमों के खिलाफ।
वायरल तस्वीरों की सच्चाई पर सवाल
कुछ सबसे ज्यादा शेयर की जा रही तस्वीरें और वीडियो की प्रामाणिकता पर सवाल उठे हैं। एक वायरल वीडियो कनाडा में रहने वाली ईरानी प्रवासी का बताया जा रहा है, जो मुजाहिदीन-ए-खल्क (MEK) समर्थक है। हालांकि, कई अन्य तस्वीरें और वीडियो ईरान से ही बताए जा रहे हैं। ईरान इंटरनेशनल और यूरानीज जैसी मीडिया संस्थाओं ने इसे प्रदर्शनों का प्रतीक बताया है।

अंतरराष्ट्रीय समर्थन और बहस
• हैरी पॉटर की लेखिका जे.के. रॉलिंग ने इस प्रतीक वाली तस्वीर शेयर कर कहा कि जो लोग मानवाधिकार की बात करते हैं लेकिन ईरान के प्रदर्शनकारियों का समर्थन नहीं करते, वे अपनी पाखंड उजागर कर रहे हैं।
• अमेरिकी सीनेटर टिम शीही ने भी खामेनेई की जलती तस्वीर से सिगरेट सुलगाने वाली तस्वीर शेयर की।
• लंदन और अन्य शहरों में ईरानी प्रवासियों ने इसी प्रतीक के साथ प्रदर्शन किए।
ऐतिहासिक संदर्भ
20वीं सदी में अमेरिका में सिगरेट को महिलाओं की आजादी का प्रतीक बनाया गया था। 1929 में एडवर्ड बर्नेज ने “टॉर्च ऑफ फ्रीडम” कैंपेन चलाया था। अब ईरान में यही प्रतीक शासन के खिलाफ इस्तेमाल हो रहा है – कॉर्पोरेट मार्केटिंग से निकला प्रतीक अब सच्चे विद्रोह का हथियार बन गया है।
प्रदर्शन अभी भी जारी हैं। मानवाधिकार संगठनों के अनुसार अब तक सैकड़ों मौतें हो चुकी हैं और हजारों गिरफ्तारियां। इंटरनेट ब्लैकआउट के बावजूद ये प्रतीक दुनिया भर में फैल रहे हैं और ईरानी महिलाओं की बहादुरी का प्रतीक बन गए हैं।

