Iran protests: ईरान में दिसंबर 2025 के अंत से चल रहे बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शनों में कुछ राहत के संकेत मिले हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उन्हें आश्वासन मिला है कि प्रदर्शनकारियों की हत्याएं और फांसी की योजनाएं रुक गई हैं, जिसके बाद उन्होंने संभावित सैन्य हमले को टाल दिया है। हालांकि, मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, रेजीम के क्रूर दमन से अब तक 2500 से ज्यादा प्रदर्शनकारियों की मौत हो चुकी है और 18,000 से अधिक गिरफ्तारियां हुई हैं।
ट्रंप का बयान और अमेरिकी रुख
ट्रंप ने बुधवार को कहा कि “ईरान में हत्याएं रुक गई हैं और आज कोई फांसी नहीं होगी।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि स्थिति पर नजर रखी जा रही है और अगर जरूरत पड़ी तो कार्रवाई होगी। इससे पहले ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि अगर प्रदर्शनकारियों को फांसी दी गई तो अमेरिका “मजबूत कार्रवाई” करेगा। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में फांसी की किसी योजना से इनकार किया और इसे “गलत जानकारी अभियान” बताया। अमेरिका ने कुछ सैन्य अड्डों से कर्मियों को निकाला था, लेकिन अब हमले की आशंका कम हुई है।
प्रदर्शनों की स्थिति
विरोध प्रदर्शन मुद्रा संकट, आर्थिक समस्याओं और रेजीम की नीतियों के खिलाफ शुरू हुए थे। रेजीम ने इन्हें दबाने के लिए अभूतपूर्व क्रूरता अपनाई है। मानवाधिकार संगठनों जैसे ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी (HRANA) के अनुसार, मौतों का आंकड़ा 2571 तक पहुंच गया है। कई वीडियो और गवाहों के बयानों में सुरक्षा बलों द्वारा मशीनगनों से गोलीबारी और अंधाधुंध हत्याओं का जिक्र है। इंटरनेट शटडाउन के बावजूद स्टारलिंक की मदद से कुछ सूचनाएं बाहर आ रही हैं। तेहरान और अन्य शहरों में सड़कों पर लाशें और अस्पतालों में भारी संख्या में घायल होने की खबरें हैं।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने अमेरिका के अनुरोध पर ईरान के प्रदर्शनों पर चर्चा की। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने रेजीम की कार्रवाइयों को “नरसंहार” करार दिया और अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग की। कुछ रिपोर्ट्स में ईरानी नेताओं द्वारा बड़ी रकम देश से बाहर ट्रांसफर करने की खबरें हैं। प्रदर्शनकारी रेजीम बदलाव और लोकतंत्र की मांग कर रहे हैं, कुछ में निर्वासित क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी का समर्थन दिख रहा है।
ताजा स्थिति
गुरुवार सुबह तक ईरान का हवाई क्षेत्र फिर खुल गया, जो बुधवार को बंद था। तेहरान में सुरक्षा बलों की भारी तैनाती है और कुछ जगहों पर अभी भी तनाव बना हुआ है। रेजीम ने प्रदर्शनकारियों को “आतंकवादी” करार दिया है, जबकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय दमन की निंदा कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि रेजीम कमजोर पड़ रहा है, लेकिन पूर्ण बदलाव में समय लग सकता है। स्थिति पर दुनिया की नजरें टिकी हैं।

