एरफान सोल्तानी का मामला
• सोल्तानी तेहरान के कराज इलाके के फरदीस निवासी हैं।
• उन्हें 8 जनवरी को अयातुल्ला अली खामेनेई के खिलाफ प्रदर्शनों में हिस्सा लेने के आरोप में गिरफ्तार किया गया।
• मानवाधिकार संगठन हेंगाव और ईरान ह्यूमन राइट्स (IHRNGO) के अनुसार, तेजी से चले ट्रायल में उन्हें “ईश्वर के खिलाफ युद्ध छेड़ने” का दोषी ठहराया गया।
• परिवार को 11 जनवरी को सजा की जानकारी दी गई, और सिर्फ 10 मिनट की मुलाकात की इजाजत मिली।
• उनकी वकील बहन को केस फाइल देखने या अपील करने से रोका गया।
• स्रोतों के मुताबिक, सजा अंतिम है और इसे टाला नहीं जा सकता।
यह प्रदर्शनों से जुड़ी पहली रिपोर्टेड फांसी है, हालांकि पहले गोलीबारी से सैकड़ों मौतें हो चुकी हैं।
प्रदर्शनों की ताजा स्थिति
• दिसंबर 2025 के अंत में ईरानी रियाल की भारी गिरावट, महंगाई और आर्थिक संकट से शुरू हुए प्रदर्शन अब राजनीतिक हो गए हैं।
• लोग खामेनेई के इस्तीफे और इस्लामिक रिपब्लिक के अंत की मांग कर रहे हैं।
• 100 से ज्यादा शहरों में विरोध जारी, लेकिन 8 जनवरी से पूर्ण इंटरनेट ब्लैकआउट के कारण जानकारी सीमित है।
• मानवाधिकार समूहों के अनुसार:
• कम से कम 648 प्रदर्शनकारियों की मौत (कुछ रिपोर्ट्स में 500-600 तक)।
• 10,000 से ज्यादा गिरफ्तारियां।
• सुरक्षा बलों की ओर से 48-134 मौतें।
• स्टारलिंक की मदद से कुछ वीडियो बाहर आ रहे हैं, जिनमें सुरक्षा बलों पर निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने के आरोप हैं।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
• अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर दबाव बढ़ाया है, जिसमें ईरान के व्यापारिक साझेदारों पर 25% टैरिफ शामिल है।
• ट्रंप ने सैन्य कार्रवाई की धमकी दी है अगर प्रदर्शनकारियों पर अत्याचार जारी रहा।
• कुछ देशों (अमेरिका, स्वीडन) ने अपने नागरिकों को ईरान छोड़ने की सलाह दी है।
• मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी और ह्यूमन राइट्स वॉच ने इंटरनेट ब्लैकआउट को “अत्याचार छिपाने” का तरीका बताया।
ईरान सरकार ने प्रदर्शनों को “विदेशी साजिश” करार दिया है और अमेरिका-इजरायल पर आरोप लगाए हैं। स्थिति तेजी से बदल रही है, और सोल्तानी की सजा पर दुनिया की नजरें टिकी हैं।

