तेहरान/दुबई। अमेरिका और इजरायल द्वारा 28 फरवरी को ईरान पर बमबारी अभियान शुरू होने के बाद से ईरान और उसके सहयोगी समूहों ने खाड़ी देशों के बुनियादी ढांचे पर कम से कम 135 ड्रोन और मिसाइल हमले किए हैं। ये हमले सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, कुवैत, बहरीन, ओमान और इराक में फैले कम से कम 84 अहम स्थलों पर हुए। रॉयटर्स की जांच में सामने आया है कि ये हमले बेहद सटीक रहे। ईरान ने ऐसे उपकरणों को निशाना बनाया जो तेल और गैस के संचालन के लिए सबसे जरूरी थे। खाड़ी देश अक्सर नुकसान को “गिरते मलबे” का नतीजा बताते रहे, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार कई मामलों में सीधे विस्फोट के निशान और महत्वपूर्ण उपकरणों का नुकसान साफ दिखता है।
फुजैरा पोर्ट पर सबसे ज्यादा हमले
यूएई का फुजैरा पोर्ट, जो होर्मुज जलडमरूमध्य से बचकर तेल निर्यात का मुख्य रास्ता बना था, सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ। यहां कम से कम 19 हमले हुए। मार्च में मैट्रिक्स मैनिफोल्ड (तेल ट्रांसफर सिस्टम) समेत कई अहम हिस्से क्षतिग्रस्त हुए। मई में फिर हमले के बाद रिफाइंड पेट्रोलियम निर्यात लगभग एक महीने तक ठप रहा।
कतर और सऊदी अरब पर असर
कतर के रास लफ्फान एलएनजी प्लांट में दो “कोल्ड बॉक्स” नष्ट हो गए। कतर एनर्जी के सीईओ के अनुसार पूरी मरम्मत में तीन से पांच साल लग सकते हैं। सऊदी अरब में ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन के तीन पंपिंग स्टेशनों पर हमले से कच्चे तेल का प्रवाह रुक गया। सऊदी की नौ बड़ी रिफाइनरियों में से पांच और तीन प्रमुख प्रोसेसिंग हब क्षतिग्रस्त हुए। नतीजतन सऊदी तेल उत्पादन कई महीनों तक 7 मिलियन बैरल प्रतिदिन से नीचे रहा, जिससे अनुमानित 50 अरब डॉलर से ज्यादा का नुकसान हुआ।
अन्य महत्वपूर्ण लक्ष्य
– कुवैत के बिजली और डिसेलिनेशन प्लांट्स पर कई हमले।
– यूएई के एमिरेट्स ग्लोबल एल्युमिनियम स्मेल्टर में पावर प्लांट और स्मेल्टिंग सेल लाइन क्षतिग्रस्त, उत्पादन 2027 तक सामान्य होने की उम्मीद।
– बाराकाह न्यूक्लियर पावर प्लांट के सबस्टेशन पर हमला।
– बहरीन, कुवैत और सऊदी अरब के हवाई अड्डों पर कई हमले।
– अमेजन डेटा सेंटर्स भी प्रभावित हुए।
अमेरिकी सेंटकॉम ने ईरान के हमलों की निंदा की है और कहा है कि अमेरिका क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ मिलकर हजारों ड्रोन और मिसाइलों को रोकने में सफल रहा है। हालांकि खाड़ी देशों में नुकसान की पूरी जानकारी को अक्सर गोपनीय रखा जाता है। ईरान की इस रणनीति ने होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी के साथ मिलकर वैश्विक तेल और गैस बाजार को प्रभावित किया है। तेल कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गईं। विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान ने इन हमलों के जरिए अपनी सैन्य क्षमता का प्रदर्शन किया है और शांति वार्ता में अपनी स्थिति मजबूत की है। खाड़ी देशों ने ईरान के ड्रोन और मिसाइल कार्यक्रमों पर नियंत्रण की मांग करते हुए शांति समझौते की बात कही है। स्थिति अभी भी तनावपूर्ण बनी हुई है।
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