Iran-Israel war shock: गाजियाबाद में प्लास्टिक कच्चा माल 20% महंगा, PVC रेजिन एक हफ्ते में 10% उछला – 3000 फैक्टरियों में हड़कंप, 50 हजार नौकरियां दांव पर

Iran-Israel war shock: ईरान-इजरायल- अमेरिका तनाव और स्ट्रेट ऑफ हरमुज में जहाज रवानी ठप होने से खाड़ी देशों से कच्चे तेल की सप्लाई घटने के कारण गाजियाबाद की प्लास्टिक इंडस्ट्री में भारी संकट आ गया है। यहां प्लास्टिक के कच्चे माल (PP, PVC, PE और दाना) की कीमतें एक हफ्ते में 20% तक बढ़ गई हैं। रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) ने मार्च 2026 में ही PE, PP और PVC के दाम 6-8% बढ़ा दिए हैं, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर प्लास्टिक ग्रैन्यूल्स 12% महंगे हो चुके हैं। अब गाजियाबाद के छोटे-बड़े 3000+ प्लास्टिक यूनिट्स में उत्पादन महंगा पड़ रहा है, पाइपलाइन प्रोजेक्ट्स अटक गए हैं और 50 हजार प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष मजदूरों की नौकरियां खतरे में हैं।

क्या है पूरा मामला और कीमतों में उछाल?
प्लास्टिक बनाने का मुख्य कच्चा माल नैफ्था है, जो कच्चे तेल का उप-उत्पाद है। ईरान-इजरायल युद्ध के चलते खाड़ी से तेल सप्लाई घटी, जहाजों का बीमा महंगा हुआ और स्ट्रेट ऑफ हरमुज रूट बंद होने से आयात रुक गया। नतीजा गाजियाबाद के साहिबाबाद, कविंदरगढ़, बुलंदशहर रोड, मोहन नगर और लोनी इंडस्ट्रियल एरिया में PP, PVC और दाने के दाम 26 से 350 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए। पाइप बनाने वाली कंपनियों को अब 20-30% ज्यादा खर्च करना पड़ रहा है।

गाजियाबाद इंडस्ट्रीज फेडरेशन के अध्यक्ष अरुण शर्मा ने कहा, “प्लास्टिक की कीमतों में वृद्धि से माल महंगा हो गया है और डिमांड के मुताबिक सप्लाई कम हो रही है। अगर हालात ऐसे ही रहे तो छोटी इकाइयां बंद होने लगेंगी।” नगर निगम के पाइपलाइन प्रोजेक्ट पर काम कर रहे ठेकेदार विशाल चौधरी ने बताया, “जब टेंडर लिया था तब पाइप सस्ते थे। अब 20-30% महंगे हो गए हैं, काम में भारी दिक्कत आ रही है।”

गाजियाबाद पर कितना असर?
जिले में हर साल सैकड़ों करोड़ रुपये का PP, PVC और पॉलीमर आयात होता है। यहां 3000 से ज्यादा रजिस्टर्ड यूनिट्स PVC/CPVC पाइप, पैकेजिंग फिल्म, मोल्डेड फर्नीचर, हाउसहोल्ड गुड्स और ऑटो पार्ट्स बना रही हैं। कई कंपनियों का टर्नओवर 50-100 करोड़ रुपये सालाना है। कीमतों के उछाल से निर्यात प्रभावित हो रहा है, छोटे ठेकेदार टूट रहे हैं और बड़े प्रोजेक्ट्स (जैसे नगर निगम की पाइपलाइन) अटक गए हैं। विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगर युद्ध लंबा चला तो 10-20% और कीमतें बढ़ सकती हैं, जिससे डामन की तरह यहां भी 25% यूनिट्स बंद होने का खतरा है।

राष्ट्रीय और वैश्विक तस्वीर
देशभर में भी यही हाल है। प्लाई रिपोर्टर और S&P ग्लोबल के मुताबिक PVC रेजिन की कीमतें एक हफ्ते में 10%+ बढ़ी हैं। यूरोप और एशिया सबसे ज्यादा प्रभावित हैं क्योंकि वे मिडिल ईस्ट से पॉलीमर आयात करते हैं। भारत में भी RIL समेत बड़े प्लांट्स ने मार्च में 6-8% हाइक कर दिया। इकोनॉमिक एक्सपर्ट्स चेताव रहे हैं कि अगर हरमुज रूट नहीं खुला तो पेट्रोकेमिकल्स, दवाइयां, पैकेजिंग और इलेक्ट्रॉनिक्स सब महंगे हो जाएंगे।

सरकार और उद्योगपतियों की प्रतिक्रिया
अभी केंद्र या उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से कोई विशेष राहत पैकेज घोषित नहीं हुआ है। गाजियाबाद इंडस्ट्रीज फेडरेशन सरकार से अपील कर रहा है कि आयात ड्यूटी कम की जाए या लोकल पेट्रोकेमिकल उत्पादन बढ़ाने के लिए सब्सिडी दी जाए। व्यापारी कह रहे हैं—अगर 15 दिन और युद्ध चला तो पूरी सप्लाई चेन बिखर जाएगी।

निष्कर्ष: ईरान-इजरायल तनाव अब गाजियाबाद के छोटे उद्योगों तक पहुंच गया है। प्लास्टिक इंडस्ट्री देश की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है और यहां की 50 हजार से ज्यादा परिवारों की रोजी-रोटी इससे जुड़ी है। उद्योगपति उम्मीद कर रहे हैं कि जल्दी शांति स्थापित हो और कीमतें काबू में आएं, वरना महंगाई और बेरोजगारी दोनों बढ़ेंगी। फिलहाल बाजार में हड़कंप है और हर कोई “वेट एंड वॉच” मोड में है।

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