Iran-US: तेहरान/वॉशिंगटन। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ईरान और अमेरिका के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर घलीबाफ ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हालिया चेतावनियों पर कड़ा पलटवार किया है। घलीबाफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अंग्रेजी में पोस्ट करते हुए ट्रंप को चेताया कि उनके “लापरवाह कदम” न केवल अमेरिका बल्कि पूरे क्षेत्र को गंभीर संकट में डाल सकते हैं। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की नीतियों पर चलता रहा, तो “पूरा क्षेत्र जल उठेगा” और इसके परिणाम बेहद खतरनाक होंगे।
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ट्रंप का दावा—ईरानी जनता सरकार से नाराज
वहीं डोनाल्ड ट्रंप ने एक इंटरव्यू में कहा कि ईरान के कई नागरिक अपनी सरकार से असंतुष्ट हैं और ऐसे किसी भी कदम का समर्थन कर सकते हैं, जिससे मौजूदा शासन कमजोर हो। उन्होंने कहा कि ईरानी “डर के साये में जी रहे हैं” और अमेरिका उन्हें बीच में नहीं छोड़ेगा।
संयुक्त राष्ट्र में ईरान की शिकायत
इस बीच संयुक्त राष्ट्र में ईरान के मिशन ने ट्रंप के बयानों को “नागरिकों को डराने की कोशिश” करार दिया है। तेहरान ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप की अपील करते हुए कहा कि इस तरह की धमकियां संभावित “युद्ध अपराध” की ओर इशारा करती हैं और समय रहते कदम उठाना जरूरी है।
विदेश मंत्रालय ने बताया ‘अपराधी मानसिकता’
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगही ने भी ट्रंप के बयानों की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि किसी देश के बुनियादी ढांचे और ऊर्जा क्षेत्र पर हमले की धमकी देना “अपराधी मानसिकता” को दर्शाता है। बगही ने इसे “युद्ध अपराध और मानवता के खिलाफ अपराध के लिए उकसावा” बताया।
होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ा तनाव
तनाव उस समय और बढ़ गया जब ट्रंप ने चेतावनी दी कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य बंद रहा तो ईरान को गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। इस बयान के बाद दोनों देशों के बीच बयानबाजी और तेज हो गई है। कुल मिलाकर, दोनों देशों के बीच बढ़ती तल्खी ने वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी है, और विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हालात नहीं संभले तो क्षेत्रीय स्थिरता पर गंभीर असर पड़ सकता है।
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