जून से दिसंबर 2025 तक देशभर में 10,000 कर्जदारों पर किए गए सर्वे के अनुसार, 85% परेशान कर्जदार अपनी मासिक आय का 40% से ज्यादा ईएमआई चुकाने में खर्च कर रहे हैं। खासकर 35,000 से 65,000 रुपये मासिक आय वाले परिवारों में ईएमआई का बोझ 28,000 से 52,000 रुपये तक पहुंच गया है। इससे घरेलू बजट पूरी तरह बिगड़ गया है और लोग जीने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
नया कर्ज पुराने कर्ज चुकाने के लिए
सर्वे में सामने आया कि 40% कर्जदार क्रेडिट कार्ड घुमाकर खर्च चलाते हैं, जबकि 22% रिश्तेदारों या अनौपचारिक स्रोतों से उधार लेते हैं। कई लोग पुराने कर्ज चुकाने के लिए नया लोन ले रहे हैं, जिससे ब्याज का बोझ बढ़ता जा रहा है और कर्ज का चक्र खत्म नहीं हो रहा।
जरूरी खर्चों में कटौती
ईएमआई के दबाव में 65% परिवारों ने आवश्यक खर्चों में कटौती की है। बच्चों की पढ़ाई छुड़वाई, इलाज टाला, बीमा पॉलिसी कैंसल की और खाने-पीने का बजट घटाया। 16% ने सैलरी एडवांस लिया, जबकि 15% ने सोना-गहने या अन्य संपत्ति बेची। बचत खत्म होने के बाद अगले संकट के लिए कोई कुशन नहीं बचा है।
रिकवरी एजेंटों का उत्पीड़न
जैसे-जैसे ईएमआई चुकाने की क्षमता कम होती है, रिकवरी का दबाव बढ़ता जाता है। 72% कर्जदारों ने रिकवरी एजेंटों से उत्पीड़न की शिकायत की, जिसमें 67% को लगातार फोन और गाली-गलौज का सामना करना पड़ा। कई को महीने में 50 से 100 कॉल्स आएं। कॉल्स सुबह 6 बजे से रात 10 बजे तक आती हैं, धमकी भरे मैसेज आते हैं। 11% के घर-दफ्तर पर एजेंट पहुंचे, 8% को कानूनी कार्रवाई की धमकी मिली।
सबसे गंभीर बात यह कि 18% मामलों में परिवार वालों को धमकाया गया, 22% में रिश्तेदारों को संपर्क किया गया और 12% में नौकरी पर असर पड़ा। ये तरीके अक्सर नियमों के खिलाफ होते हैं, लेकिन कर्जदारों को अपने अधिकारों की जानकारी कम है।
मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर
इस संकट का असर सिर्फ आर्थिक नहीं, भावनात्मक भी है। आधे से ज्यादा कर्जदारों ने चिंता, नींद की कमी, डिप्रेशन, पारिवारिक कलह और काम पर असर की बात कही। कुछ मामलों में आत्महत्या के विचार तक आए।
क्यों बढ़ रहा है यह संकट?
विशेषज्ञों के अनुसार, बाय नाउ पे लेटर (BNPL), इंस्टैंट लोन ऐप्स और पर्सनल लोन तेजी से बढ़े हैं, लेकिन आय जांच और पारदर्शिता कम है। रिकवरी नियम सख्ती से लागू नहीं होते। घरेलू कर्ज जीडीपी का 41-42% तक पहुंच गया है, जो पांच साल के औसत से ज्यादा है।
रिपोर्ट में सुझाव दिए गए हैं:
औपचारिक डेट रिलीफ सिस्टम, रिकवरी एजेंसियों पर सख्त नियम, हाई-रिस्क लोन पर ब्याज कैप, ऐप-आधारित लेंडर्स की निगरानी और स्कूल-कार्यस्थल पर फाइनेंशियल लिटरेसी।
यह संकट धीरे-धीरे बढ़ रहा है—एक ईएमआई, एक लोन नोटिफिकेशन और एक परिवार की मुश्किल से। आसान कर्ज जीवन आसान बनाने के लिए थे, लेकिन लाखों के लिए यह मासिक दर्द बन गए हैं।

