New Delhi news भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने ‘इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन’ (आईएसएम) की चौथी वर्षगांठ पर देश की डिजिटल प्रगति का विस्तृत रोडमैप पेश किया। कार्यक्रम के दौरान वैष्णव ने सेमीकॉन इंडिया प्रोग्राम की डिज़ाइन लिंक्ड इंसेंटिव (डीएलआई) स्कीम के तहत मंज़ूर 23 सेमीकंडक्टर चिप डिज़ाइन कंपनियों के साथ बातचीत की। उन्होंने आश्वासन दिया कि भारत जल्द ही वैश्विक सेमीकंडक्टर उद्योग में एक प्रमुख शक्ति बनकर उभरेगा।
अश्विनी वैष्णव ने बताया कि पिछले चार वर्षों में मिशन ने जमीनी स्तर पर महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। देश भर में 10 बड़े प्रोजेक्ट्स पर तेजी से काम चल रहा है, जिनमें से इस वर्ष 4 परियोजनाओं में उत्पादन शुरू होने की उम्मीद है। उन्होंने यह भी बताया कि स्टार्टअप इकोसिस्टम में भी जबरदस्त प्रगति हुई है, जहां लगभग 24 स्टार्टअप्स ने सफलतापूर्वक सेमीकंडक्टर चिप्स डिजाइन किए हैं।
साथ ही, भविष्य की जरूरतों और कुशल वर्कफोर्स के लिए 315 शैक्षणिक संस्थानों में छात्रों को चिप डिजाइनिंग का विशेष प्रशिक्षण दिया गया है।
स्वदेशी तकनीक और आत्मनिर्भर भारत
अश्विनी वैष्णव ने कहा कि मिशन का उद्देश्य केवल असेंबली तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत को आत्मनिर्भर बनाना है। मिशन के तहत देश 6 प्रमुख प्रणालियों में अपनी खुद की इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (आईपी) विकसित करेगा: कंप्यूट, आरएफ, नेटवर्किंग, पावर, सेंसर और मेमोरी।
भविष्य का रोडमैप: 2029 और 2035
मंत्री ने स्पष्ट किया कि साल 2029 तक भारत सेमीकंडक्टर उद्योग में एक प्रमुख खिलाड़ी बन जाएगा, जबकि 2035 तक दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण सेमीकंडक्टर देशों में शामिल हो जाएगा। यह मिशन न केवल तकनीकी आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करेगा, बल्कि वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स और चिप निर्माण सप्लाई चेन में भारत की भूमिका को निर्णायक बनाएगा।
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