सोयाबीन और तेलबीज किसानों पर दबाव
सोयाबीन किसान (मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान) और तेलबीज (सरसों, मूंगफली – राजस्थान, गुजरात, उत्तर प्रदेश) उगाने वालों को चुनौती मिल सकती है। सस्ता अमेरिकी सोयाबीन ऑयल और प्रोसेस्ड उत्पाद आयात से घरेलू मंडी में भाव गिर सकते हैं। किसान संगठनों ने इसे “किसान-विरोधी” बताकर विरोध शुरू कर दिया है।
DDGS और मक्का पर असर
DDGS (एथेनॉल उत्पादन का उप-उत्पाद, पशु आहार) के सस्ते आयात से मक्का किसान (उत्तर प्रदेश, बिहार, कर्नाटक, पंजाब-हरियाणा) प्रभावित हो सकते हैं। घरेलू पशु आहार उद्योग और छोटे प्रोसेसिंग यूनिट्स को नुकसान की आशंका है। हालांकि GM सोयाबीन और मक्का पर बैन बरकरार है।
उपभोक्ताओं को राहत
आम उपभोक्ताओं को फायदा मिल सकता है। सस्ता आयात से खाने का तेल (सोयाबीन, सरसों), दूध, अंडा, चिकन और पैक्ड फूड के दाम स्थिर या कम हो सकते हैं। भारत पहले से 50-60% खाद्य तेल आयात करता है, इसलिए यह राहत बड़ी हो सकती है। डेयरी-पोल्ट्री सेक्टर की उत्पादन लागत घटेगी।
संरक्षित क्षेत्र और निर्यात अवसर
चावल, गेहूं, दूध-डेयरी मुख्य फसलें समझौते से बाहर हैं, इसलिए खाद्य सुरक्षा सुरक्षित है। निर्यातकों को अवसर: चाय, कॉफी, मसाले, फल-बागवानी उत्पादों को अमेरिकी बाजार में बेहतर पहुंच और दाम मिल सकते हैं। कॉमर्स मिनिस्ट्री ने इसे “संतुलित” बताया, लेकिन किसान यूनियंस आगे प्रदर्शन की तैयारी कर रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि असर मिला-जुला है – कुछ किसानों के लिए चुनौती, उपभोक्ताओं और निर्यातकों के लिए उम्मीद। आगे बातचीत में शर्तें बदली जा सकती हैं।

