‘India is not a nation, it’s just a population’: ओडिशा हाईकोर्ट ने ग्राम पंचायत सदस्य की याचिका खारिज करते हुए दो बच्चों से अधिक संतान होने पर अयोग्यता के प्रावधान को बरकरार रखा है। कोर्ट ने जनसंख्या वृद्धि के खतरे पर गंभीर चिंता जताते हुए ब्रिटिश पूर्व प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल, दार्शनिक बर्ट्रेंड रसेल और अर्थशास्त्री थॉमस मैल्थस के उद्धरण भी पेस किए। जस्टिस केआर श्रीपाद दीक्षित और जस्टिस चित्तरंजन दाश की डिवीजन बेंच ने कहा कि भारत में बढ़ती आबादी एक गंभीर समस्या है और इसके नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है।
कोर्ट ने फैसले में चर्चिल के उस कथन का जिक्र किया, “India is not a nation, but a mere population” (भारत कोई राष्ट्र नहीं, बल्कि मात्र एक जनसंख्या है)। जस्टिस दीक्षित ने लिखा कि यह बात विभाजन से पहले कही गई थी, जब अविभाजित भारत की आबादी करीब 30 करोड़ थी। अगर चर्चिल आज जीवित होते तो आज की 143 करोड़ से अधिक आबादी देखकर और क्या कहते, यह कल्पना से परे है।
कोर्ट ने बर्ट्रेंड रसेल के हवाले से कहा, “जनसंख्या विस्फोट हाइड्रोजन बम से ज्यादा खतरनाक है।” मैल्थस के सिद्धांत का उल्लेख करते हुए कहा गया कि बिना नियंत्रण के जनसंख्या हर 25 साल में दोगुनी हो जाती है। कोर्ट ने कोविड-19 महामारी के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग की मुश्किलों का भी जिक्र किया और कहा कि बढ़ती आबादी कई कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में बाधा बन रही है।
मामला ओडिशा ग्राम पंचायत एक्ट, 1964 की धारा 25(1)(v) से जुड़ा है, जो दो से अधिक बच्चे होने पर पंचायत सदस्यता के लिए अयोग्य ठहराता है। याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि 1994 के संशोधन से पहले उनके तीन-चार बच्चे हो चुके थे और उन्हें छूट मिलनी चाहिए, लेकिन कोर्ट ने सिंगल जज के फैसले को बरकरार रखते हुए याचिका खारिज कर दी।
कोर्ट ने संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि भारत की आबादी 2023 में 143 करोड़ थी, जो अब और बढ़ चुकी है और 2050 तक 170 करोड़ होने का अनुमान है। कोर्ट ने जनसंख्या नियंत्रण के लिए संवैधानिक संस्थाओं और सिविल सोसाइटी से तत्काल कदम उठाने की अपील की। कोर्ट ने कहा कि अत्यधिक जनसंख्या पर्यावरण, संसाधनों और समाज पर भारी दबाव डाल रही है।
यह फैसला आज ही प्रकाशित हुआ है और जनसंख्या नियंत्रण पर बहस को नई दिशा दे सकता है। फिलहाल इस पर कोई अपील या प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

