इंडिया ब्लॉक का प्रदर्शन सड़क पर सीईसी के खिलाफ सियासी बवाल

नई दिल्ली, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में मंगलवार सुबह इंडिया (INDIA) गठबंधन के विपक्षी दलों ने ‘सेव डेमोक्रेसी मार्च’ शुरू कर दिया। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर नाम कटने के आरोपों के खिलाफ विपक्षी सांसद संसद भवन के मकर द्वार से चुनाव आयोग के मुख्यालय (निर्वाचन सदन) तक करीब तीन किलोमीटर का पैदल मार्च निकाल रहे हैं।

इस मार्च में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, एनसीपी (शरद पवार), शिवसेना (यूबीटी), आरजेडी, सीपीएम, सीपीआई, नेशनल कॉन्फ्रेंस, पीडीपी, जेएमएम, सीपीआई-एमएल, आईयूएमएल, केसी (एम), एमडीएमके, वीसीके, आरएसपी, एआईएफबी और केसी (जे) समेत 19 विपक्षी दलों के 140 से अधिक सांसद शामिल होने का दावा किया जा रहा है। समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव, तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी, शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत समेत कई प्रमुख नेता मार्च में हिस्सा ले रहे हैं। कांग्रेस नेता के.सी. वेणुगोपाल ने कहा कि विपक्ष शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना चाहता है और पुलिस से अनुरोध किया गया है कि मार्च को रोका न जाए। जयराम रमेश ने भी सांसदों से मकर द्वार पर 10:30 बजे एकत्र होने और 11 बजे मार्च शुरू करने की अपील की थी।

सुरक्षा व्यवस्था कड़ी, ट्रैफिक प्रभावित
मार्च को लेकर दिल्ली पुलिस ने व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए हैं। नई दिल्ली जिले में 3,000 से 4,000 पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं, जिनमें पुरुषों की 27 कंपनियां और महिलाओं की चार कंपनियां शामिल हैं। रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के जवान आकाशवाणी और ट्रांसपोर्ट भवन के आसपास तैनात हैं। संसद मार्ग, पटेल चौक, कनॉट प्लेस, अशोक रोड, जंतर-मंतर रोड और निर्वाचन सदन के आसपास कई परतों वाली बैरिकेडिंग लगाई गई है। पुलिसकर्मियों ने बॉडी कैम भी लगाए हुए हैं। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने सुबह 8 बजे से इन इलाकों में ट्रैफिक डायवर्जन और प्रतिबंध लगाए हैं। यात्रियों को मेट्रो या सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है। पुलिस का कहना है कि किसी भी मार्च या सभा की अनुमति नहीं दी गई है।

विपक्ष की मांगें और आरोप
 विपक्ष SIR प्रक्रिया में करीब 13 करोड़ नाम कटने का आरोप लगा रहा है और इसे ‘वोट चोरी’ बता रहा है। मुख्य मांगें हैं—

  1. मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा।
  2. SIR प्रक्रिया को रद्द करना और पुरानी मतदाता सूची बहाल करना।
  3. भविष्य के चुनाव बैलेट पेपर से कराना।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने पहले इन मांगों को गैर-परक्राम्य बताया था। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग भाजपा के लिए काम कर रहा है। शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने भारी सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि वे बिना हथियारों के सिर्फ इस्तीफे की मांग करने आए हैं।

AAP और कुछ दल अलग
आम आदमी पार्टी (AAP) ने इस मार्च से दूरी बनाए रखी है। पार्टी का कहना है कि वह SIR के खिलाफ अपनी लड़ाई खुद लड़ रही है। डीएमके भी इसमें शामिल नहीं हुई है। हालांकि बीजेडी ने कुछ रिपोर्टों में समर्थन जताया है। यह मार्च 30 सितंबर को इंडिया ब्लॉक की बैठक के बाद घोषित ‘सेव डेमोक्रेसी’ अभियान का हिस्सा है, जिसमें 2 से 8 अक्टूबर तक जिला स्तर पर प्रदर्शन और नवंबर में बड़े रैलियां शामिल हैं। विपक्ष राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से भी मुलाकात कर अपनी बात रखने की योजना बना रहा है।

दिल्ली में पहले भी 2 अक्टूबर (गांधी जयंती) को SIR और ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन हुए थे, जिनमें सैकड़ों लोग हिरासत में लिए गए थे। आज का मार्च उसी सिलसिले को आगे बढ़ाता है। दोनों तरफ से राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। भाजपा ने विपक्ष पर वंशवाद और भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए कहा कि जनता समझदार है। मार्च जारी है। सुरक्षा बल पूरी सतर्कता के साथ तैनात हैं। आगे की स्थिति पर नजर बनी हुई है।

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