कटक SCB अस्पताल के ICU में आग: ‘आज डिस्चार्ज होने वाले थे पिता’, 10 मरीजों की मौत, शोक-संताप और अफरा-तफरी, जांच शुरू

कटक SCB अस्पताल के ICU में आग: ओडिशा के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल SCB मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के ट्रॉमा केयर सेंटर की पहली मंजिल पर स्थित ICU में सोमवार तड़के (2:30 से 3 बजे के बीच) भीषण आग लग गई। आग की चपेट में आने से 10 मरीजों की मौत हो गई, जबकि 11 अस्पताल कर्मचारियों को जलने के घाव आए (स्थिति स्थिर बताई जा रही )। कई बचाए गए मरीज अभी भी गंभीर हालत में हैं। धुआं फैलने से पूरे अस्पताल में दहशत मच गई—रिश्तेदारों ने चीखते-चिल्लाते वार्डों में खोजबीन की, कुछ ने आधार कार्ड दिखाकर मॉर्चरी पहुंचकर शव पहचाने जा रहे है।

आज डिस्चार्ज होने वाले थे’—परिवारों की कहानी
रुषभ परिदा (57, अंगुल जिले के सुबरनापुर गांव) का 101 वर्षीय पिता एक हफ्ते पहले बैल के हमले में सिर में गंभीर चोट लगने के बाद ICU में भर्ती थे। डॉक्टरों ने रविवार शाम कहा था—‘कल डिस्चार्ज कर देंगे’। रुषभ बाहर सो रहे थे, तभी 2:40 बजे चीखें सुनाई दीं। धुएं के गुबार में कुछ नजर नहीं आया। बाद में मॉर्चरी में जल कर काला पड़ा शव मिला। रुषभ ने रोते हुए कहा, “पिता ठीक हो चुके थे… आज घर ले जाने वाले थे, लेकिन…”। पुष्पलता पुहन (47, जाजपुर) के पिता ब्रेन स्ट्रोक के बाद 5 दिन से ICU में थे। हालत सुधर रही थी, खुद चलने लगे थे। सुबह खोजते-खोजते मॉर्चरी पहुंचीं। आधार कार्ड दिखाकर शव की पहचान की। पुष्पलता ने कहा, “पापा ठीक हो रहे थे… अचानक ये क्या हो गया?” अन्य परिवार भी वार्डों में भटकते रहे, कोई अपना अपनों का पता नहीं लगा पा रहा था।

आग कैसे लगी और बचाव में देरी
प्रारंभिक जांच में संदिग्ध शॉर्ट सर्किट को कारण बताया गया। 25 मरीज ICU में थे। आग एक बेड के पास शुरू हुई, धुआं इतना घना कि अंदर जाना मुश्किल हो गया। स्प्रिंकलर सिस्टम फेल, फायर एक्सटिंग्विशर काम नहीं किए। अस्पताल कैंपस में ही फायर स्टेशन होने के बावजूद फायर टेंडर पहुंचने में 30 मिनट लग गए। नर्सिंग स्टाफ और सिक्योरिटी गार्ड ने कंधों पर उठाकर मरीजों को बाहर निकाला—23 मरीजों को अन्य वार्डों में शिफ्ट किया गया, लेकिन 7 की मौत ट्रांसफर के दौरान हो गई, 3 बाद में दम तोड़ गए।

सरकारी रुख और कार्रवाई
मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी सुबह-सुबह अस्पताल पहुंचे, स्थिति का जायजा लिया और स्वास्थ्य मंत्री मुकेश महालिंग के साथ मरीजों का हाल पूछा।मृतकों के परिवारों को ₹25 लाख प्रत्येक एक्स-ग्रेशिया देने का ऐलान। ज्यूडिशियल जांच और हाई-लेवल इंक्वायरी के आदेश—कारण, लापरवाही और सुरक्षा खामियों की पड़ताल होगी।राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री ने भी शोक व्यक्त किया। वरिष्ठ अधिकारियों को अस्पताल में कैंप करने के निर्देश दिए गए ताकि घायलों का तुरंत इलाज हो सके।

अस्पताल की पुरानी समस्या
SCB ओडिशा, पश्चिम बंगाल, बिहार और झारखंड के हजारों मरीजों का आखिरी सहारा है। इससे पहले भी यहां आग की घटनाएं हो चुकी हैं, लेकिन फायर सेफ्टी पर स्थायी सुधार नहीं हुआ। अब सवाल उठ रहे हैं—क्या स्प्रिंकलर, अलार्म और स्टाफ ट्रेनिंग में घोर लापरवाही थी? धुआं साफ हो चुका है, लेकिन कटक अस्पताल में शोक और गुस्से का माहौल है। मृतकों के परिवार न्याय और सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव की मांग कर रहे हैं। जांच रिपोर्ट आने तक यह ट्रॉमा सेंटर की लापरवाही का सबसे बड़ा उदाहरण बन गया है।

यहां से शेयर करें