Yamuna Authority: यूपी में औद्योगिक विकास को रफ्तार देने की बात मुख्यमंत्री योगी आदित्यानाथ हर प्लेटफार्म पर करते है लेकिन उन्हीं की सरकार के अफसर उनकी छवि को घूमिल कर रहे है। उद्यमियों की पंसदीता जगह यमुना प्राधिकरण क्षेत्र बन चुका है। जहां यीडा ने बड़े बड़े भूखंड आवंटित किया मगर उनपर कब्जा अब तक नही दे पाया है। दैनिक जागरण ने दावा किया है कि यीडा ने 2019 में सेक्टर 32 में औद्योगिक भूखंडों का आवंटन किया था। नोएडा में रेडीमेड गारमेंट की फैक्ट्री चलाने वाले सुरेश भाटी ने अपने कारोबार के विस्तार के लिए यीडा में औद्योगिक भूखंड के लिए आवेदन किया।
प्राधिकरण ने उन्हें 2019 में 1800 वर्गमीटर का भूखंड आवंटित कर दिया। भूखंड की कीमत को दस किस्तों में भुगतान करने की शर्त थी। उन्होंने दस किस्तों में भूखंड की कुल कीमत 1 करोड़ 20 लाख रुपये का फरवरी 2025 में पूरी तरह से भुगतान भी कर दिया।इसके बाद से सुरेश भाटी भूखंड की रजिस्ट्री और कब्जे के लिए यीडा के चक्कर लगा रहे हैं। पिछले करीब छह माह से उन्हें केवल आश्वासन के अलावा कुछ और नहीं मिला है। हर बार जल्द कब्जा देने का भरोसा देकर लौटा दिया जाता है।
सुरेश भाटी को जो भूखंड आवंटित हुआ है, वह जमीन यीडा अभी तक किसान से क्रय नहीं कर पाया है। किसान की जमीन पर यीडा से तीन से चार औद्योगिक भूखंड नियोजित हैं। भूखंड पर कब्जा दिलाने की मांग को लेकर मंगलवार को सुरेश भाटी एक बार फिर सीईओ राकेश कुमार सिंह के पास पहुंचे थे।
उद्योग विभाग ने उन्हें भरोसा दिया कि किसान से जमीन जल्द क्रय कर विकसित करने के बाद कब्जा दिया जाएगा। सीईओ राकेश कुमार सिंह ने भूलेख और उद्योग विभाग को निर्देश दिया है कि वह किसान से वार्ता कर जमीन क्रय की कार्रवाई को जल्द पूरा करें। ताकि आवंटी को जल्द कब्जा सौंपा जा सके। ये एक उद्यमी का हाल नही बल्कि काफी ऐसे मामले है जिन में प्राधिकरण पैसा ले चुका है लेकिन किसनों से जमीन क्रय न होने की वजह से भूखंडों पर कब्जा नही दिया गया है।
उद्यमियों को ऐसे नोटिस भेज रहा यमुना प्राधिकरण
बता दें कि औद्योगिक भूखंड पर कब्जा मिलने के बावजूद उद्योग न लगाने पर यीडा उद्यमियों को नोटिस जारी कर रहा है। उनसे औद्योगिक इकाई के निर्माण की कार्ययोजना मांगी जा रही है, लेकिन यीडा की इस कार्रवाई से उद्यमियों में रोष है। उनका कहना है कि अभी कई आवंटियों को भूखंड पर कब्जा तक नहीं मिला है। 2013 की योजना में अभी भी 115 आवंटियों को कब्जा मिलना शेष है। सड़क, सीवर, पानी, बिजली के काम जगह-जगह अधूरे हैं, इसके बावजूद आवंटियों पर निर्माण के लिए दबाव बनाया जा रहा है, अधूरी सुविधाओं के बीच निर्माण करना और उद्योग चलाना कैसे संभव होगा।
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