होलिका दहन हिंदू धर्म का प्रमुख त्योहार है, जो भक्त प्रह्लाद और दुष्ट होलिका की कथा से जुड़ा है। यह बुराई पर अच्छाई, अहंकार पर भक्ति की जीत का प्रतीक है। लोग होलिका की प्रतिमा के साथ गुड़, चने, फूल-मालाएं चढ़ाकर पूजा करते हैं और आग जलाते हुए नकारात्मक ऊर्जा का दहन करते हैं। इस बार चंद्रग्रहण (3 मार्च को) होने के कारण कुछ पंचांगों में तिथि को लेकर थोड़ी चर्चा रही, लेकिन ज्यादातर ज्योतिषीय गणनाओं (द्रिक पंचांग, एकोनॉमिक टाइम्स, टाइम्स ऑफ इंडिया) के अनुसार होलिका दहन 3 मार्च को ही होगा। रंग वाली होली 4 मार्च को खेली जाएगी।
बधाइयों का तांता लगा हुआ है
देश भर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, विभिन्न मुख्यमंत्रियों, राजनेताओं और सामाजिक संगठनों ने होलिका दहन की पूर्व संध्या पर शुभकामनाएं देते हुए भाईचारा, प्रेम और सद्भाव का संदेश दिया। आम आदमी पार्टी (आप) की प्रवक्ता मीनाक्षी शर्मा ने भी देशवासियों को होलिका दहन की हार्दिक बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह पर्व नफरत को जलाकर प्रेम और एकता फैलाने का अवसर है।
उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात और बिहार में बड़े-बड़े होलिका दहन आयोजन की तैयारी चल रही है। दिल्ली के लाल किले के पास, जयपुर के सिटी पैलेस और वाराणसी के घाटों पर खास कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की गई है। लोग सोशल मीडिया पर #HolikaDahan2026 और #HappyHoli ट्रेंड कर रहे हैं।
महत्व और सावधानियां
धर्मशास्त्रों के अनुसार होलिका दहन से पहले होलाष्टक (8 दिन) चलता है, जिसमें नकारात्मकता दूर करने के उपाय किए जाते हैं। इस बार चंद्रग्रहण के कारण कुछ स्थानों पर ग्रहण के बाद ही दहन करने की सलाह दी गई है। स्वास्थ्य विभाग ने भी धुएं से बचने और पर्यावरण अनुकूल तरीके से होलिका जलाने की अपील की है। देश के कोने-कोने में यह पर्व हर्षोल्लास से मनाया जा रहा है। परिवारों में एक-दूसरे को बधाई देते हुए मिठाइयां बांटी जा रही हैं। जश्न का यह माहौल 2026 के हिंदू कैलेंडर की शुरुआत को और भी यादगार बना रहा है।मुहूर्त और तिथि में स्थानीय पंचांग के अनुसार थोड़ा अंतर संभव है।

