पुलिस ने तुरंत की कार्रवाई
सिंभावली पुलिस तुरंत हरकत में आई और छात्र की लोकेशन ट्रेस कर उसके घर पहुंच गई। थाना प्रभारी सुरेश कुमार के अनुसार, पुलिस को देखते ही छात्र घबरा गया और रोते हुए माफी मांगने लगा। उसने कबूल किया कि फॉलोअर्स नहीं बढ़ रहे थे, उसने दूसरे यूजर्स के ऐसे वीडियो देखे जिनमें फॉलोअर्स तेजी से बढ़े थे, इसलिए उसने भी यही तरीका अपनाया। उसने जहर नहीं खाया था, सिर्फ ड्रामा किया था। पुलिस ने छात्र को कड़ी फटकार लगाई, समझाया और भविष्य में ऐसा न करने की चेतावनी दी। काउंसलिंग के बाद उसे परिजनों के हवाले कर दिया गया। साथ ही उसका इंस्टाग्राम अकाउंट बंद करा दिया गया।
पिता की मौत के बाद बढ़ी थी लत
जांच में पता चला कि छात्र के पिता की कुछ वर्ष पहले मौत हो चुकी है। इसके बाद वह मां के फोन पर सोशल मीडिया चलाता था। मां बार-बार मना करती थीं, लेकिन वह लगातार एक्टिव रहता था। दोस्तों से वह अक्सर फॉलोअर्स और व्यूज न बढ़ने की शिकायत करता था।
सोशल मीडिया एडिक्शन के बढ़ते खतरे
यह मामला सोशल मीडिया की लत के खतरों को फिर से उजागर करता है। हाल के महीनों में उत्तर प्रदेश में मेटा अलर्ट की बदौलत पुलिस ने सैकड़ों जानें बचाई हैं। 2023 से नवंबर 2025 तक यूपी पुलिस ने 1,597 सुसाइड अटेंप्ट को रोका। जनवरी 2026 में भदोही में 22 साल के युवक की जान बचाई गई, जबकि दिसंबर 2025 में इटावा के छात्र को 15 मिनट में रेस्क्यू किया गया। साइबर एक्सपर्ट्स का कहना है कि फॉलोअर्स की होड़ मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर डाल रही है। कई देशों में 13-16 साल तक के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर सख्त प्रतिबंध हैं। भारत में भी अभिभावकों को बच्चों की ऑनलाइन एक्टिविटी पर कड़ी नजर रखने और ओपन डायलॉग बनाए रखने की सलाह दी जा रही है। हालांकि यह मामला फेक साबित हुआ, लेकिन विशेषज्ञ चेतावन देते हैं कि ऐसे स्टंट भी खतरनाक हो सकते हैं और दूसरों को गलत प्रेरणा दे सकते हैं। पुलिस और विशेषज्ञों ने अभिभावकों से अपील की है कि बच्चों के फोन यूज पर निगरानी बढ़ाएं और मानसिक स्वास्थ्य पर बातचीत करें।

